महिलाओं का नारियल फोड़ने की मनाही होती है….. चलिए जानते हैं क्यों

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लाइव पलामू न्यूज: हिंदू धर्म में नारियल को अति शुभ माना जाता है।शास्त्रों में इसे श्रीफल भी कहा जाता है और इसके जल को अमृत। इसलिए पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत नारियल फोड़कर ही की जाती है। नारियल के बिना विशेष पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन और कई शुभ कार्यों को अधूरा माना जाता है। लेकिन पूजा संबंधी कार्यों में महिलाओं को नारियल फोड़ने की अनुमति नहीं होती। चलिए जानते हैं क्यों वर्जित होता है महिलाओं का नारियल फोड़ना।संस्कृत में नारियल को श्रीफल कहा जाता है। दरअसल, नारियल को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का फल माना जाता है। इसलिए भी इसे श्रीफल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे स्वर्ग से वे अपने साथ मां लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष और कामधेनु तीन चीजें लेकर आए थें। ऐसी मान्यता है कि नारियल में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। यही कारण है कि हिंदू धर्म से जुड़े हर वैदिक या दैविक कार्य में नारियल या श्रीफल चढ़ाने का महत्व है।

विवाह तय होने के बाद, तिलक में, जनेऊ संस्कार, हल्दी रस्म आदि में नारियल को भेंट स्वरूप दिया जाता है। इसके अलावा कन्या की विदाई में पिता भी बेटी को नारियल देते हैं। कलश स्थापना, यज्ञ व हवन जैसे कई धार्मिक अनुष्ठानों में सूखे नारियल का प्रयोग किया जाता है।। इसका कारण यह होता है कि नारियल को बीज रूप माना गया है। इसलिए इसे उत्पादन या प्रजनन का कारक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि स्त्री बीज रूप में ही एक शिशु को जन्म देती है। इसलिए नारियल या श्रीफल फोड़ने की स्त्रियों को मनाही होती है। कहा जाता है कि अगर कोई महिला नारियल फोड़ती है तो उसे गर्भधारण करने में समस्या होती है। या फिर उसके संतान को कष्ट होता है। इसी कारण महिलाओं को नारियल नहीं फोड़ना चाहिए।

(नोट: ये लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, लाइव पलामू इसकी पुष्टि नहीं करता)

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