आखिर क्यों है दहशत ED का, ये ED, ED क्या है ये ED ED…?

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लेखक: नितेश तिवारी

लाइव पलामू न्यूज: यूँ तो अभी दिवाली का पर्व कुछ महीने बाद है जिसकी धूम मचेगी परन्तु भारत सरकार के एक विभाग के लिए तो अभी से ही दिवाली की धूम मच रही है। आज पूरे भारतवर्ष में चारों ओर उसी की चर्चा काफी जोरों पर है। हाँ हम बात कर रहे हैं ED की। लोग पूछते फिर रहे हैं कि ये ED ED क्या है? तो लाइव पलामू आज इसी पहलू का उत्तर लेकर आया है। आखिर इस ED ने ऐसा क्या कर रखा है कि नेताओं को स्वप्न में भी यह दिखने लगा है। देश की कई दिग्गज हस्तियाँ आज इसके लपेटे में हैं। सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, पार्थ चटर्जी , अर्पिता मुखर्जी , संजय राउत तो वहीं झारखण्ड में पूजा सिंघल, मुख्यमंत्री करीबी पंकज मिश्रा आदि जैसे लोग ED के घेरे में हैं। CBI से ज्यादा खौफ अब इस ED का बैठ गया है। तो जनाब शुरुआत यहीं से करते हैं यानि कि ED से। ED का मतलब Enforcement Directorate( इनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ) जिसका ये संक्षिप्त रुप है। सामान्य हिन्दी में बात करें तो इसे ‘प्रवर्तन निदेशालय’ के नाम से जाना जाता है। ये ED भारत सरकार की प्रीमियर जाँच एजेन्सी है जो देश में विदेशी धन और निवेश में गड़बड़ी से जुड़े मामले देखती है। इस ED का मुख्यालय देश की राजधानी नई दिल्ली में है। इसके अतिरिक्त पाँच क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं।


ED का गठन:-


ED का गठन आज से 66 वर्ष पूर्व 1 मई 1956 को हुआ था। गठन इसका प्रवर्तन इकाई के रूप में हुआ था किन्तु गठन के एक वर्ष उपरान्त 1957 में इसे प्रवर्तन निदेशालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। यह एजेंसी वित्त मंत्रालय के अधीन काम करती है। आरम्भ में बम्बई और कलकत्ता में ही इसकी शाखाएँ थीं लेकिन निदेशालय में रूपांतरण होने के पश्चात मद्रास में भी इसकी शाखा खुल गई थी।


ED के कार्यः –


बहुअनुशासनिक संगठन ED धनशोधन के अपराध और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के जाँच के हेतु आधिदेशित है। निम्नलिखित कानूनों के तहत यह अपना कार्य करती है –

1) धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 ( PMLA, 2002 )

एक आपराधिक कानून है जिसे धन शोधन ( मनी लॉड्रिंग ) को रोकने के लिए तथा इससे प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने के लिए तथा उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए अधिनियमित किया गया है। ED को इस तरह के अपराध की आय से प्राप्त संपत्ति का पता लगाने हेतु अन्वेषण करने, संपत्ति को अस्थायी रूप से संलग्न करने और इसमें लिप्त अपराधियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने और विशेष अदालत द्वारा संपत्ति की जब्ती सुनिश्चित करवाते हुए प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


2) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 ( FEMA)-


इस कानून के अंतर्गत विदेशी व्यापार एवं भुगतान की सुविधा से संबंधित कानूनों की समेकित तथा संशोधित करने और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित विकास व रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए अधिनियमित किया गया है। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में ED को जाँच के साथ ही जुर्माना लगाने की भी जिम्मेदारी दी गई है।


3 ) भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम , 2018 (FEOA):-


यह कानून आर्थिक अपराधियों को भारतीयन्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर भागकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने से रोकने हेतु बनाया गया था। यह एक ऐसा कानून है जिसके तहत निदेशालय को ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधी जो गिरफ्तारी से बचते हुए भारत से बाहर भाग गए हैं , उनकीसंपत्तियों को कुर्क करने के लिए तथा उनकी संपत्तियों को केन्द्र सरकर से संलग्न करने का प्रावधान करने हेतु अधिदेशित किया गया है।


4) विदेशी मुद्रा विनिमयन अधिनियम , 1973 ( FERA) :-


निरसित FERA के तहत मुख्य कार्य उक्त अधिनियम के कथित उल्लंघनों के लिए उक्त अधिनियम के तहत 31 मई 2002 तक जारी कारण बताओ नोटिस का न्याय निर्णयन करना है जिसके आधार पर संबंधित अदालतों में जुर्माना लगाया जा सकता है और FERA के तहत प्रारम्भ किए गए मुकदमों को आगे बढ़ाया जा सकता है।


5) सीओएफईपीओएसए (C0FEPOSA) के तहत प्रायोजक एजेंसी :-


विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम , 1974 ( COFEPOSA) के तहत इस निदेशालय को फेमा के उल्लंघनों के संबंध में निवारक निरोध के मामलों को प्रायोजित करने का अधिकार है। अधिकारी जोश में हों तो विभाग भी स्वतः ही जोश में आ जाता है। ऐसा ही ED के साथ अभी है। भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी संजय कुमार मिश्रा अभी इसके डायरेक्टर हैं जिनकी अगुवाई में ED 2018 से काफी तेजी से कार्यरत है। हाई प्रोफाइल मामलों की जाँच के लिहाज से इसने CBI की जगह ले ली है। यही वजह है कि CBI से ज्यादा अब इसका खौफ कायम हो गया है। पिछले तीन वित्तीय वर्ष में ED ने PMLA के तहत 2723 इनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट ( ECIR ) फाइल की है। इसके मुकाबले पिछले 14 साल में इसने कुल 2699 मामले फाइल किए थे। वहीं ED ने फेमा के तहत 11420 मामलों में जाँच शुरू की है। यह इससे पूर्व के पाँच वर्षों के मुकाबले 710 ज्यादा है। ये आंकड़े इसकी व्यापक सक्रियता को दर्शाते हैं।


वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि वर्ष 2004-05 और 2013-14 के बीच PMLA के तहत ED ने 5346 करोड़ रूपए की संपत्तियाँ जब्त की हैं तो वहीं 2014 -15 से 2021-22 के दौरान 99356 करोड़ रूपए की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। FEMA के तहत मामलों की संख्या कम हैं। 2004-05 और 2013-14 के दौरान FEMA के तहत ED ने सिर्फ 14 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की जबकि 1754 करोड़ रूपए की पेनाल्टी लगाई। हालांकि अगले कुछ सालों में इसमें उछाल आया तथा केन्द्र में BJP की सरकार बनने के बाद 2014-15 और 2021-22 के मध्य पेनाल्टी बढ़कर 6377 करोड़ रूपए पर पहुँच गई, जबकि 7066 करोड़ रूपए की संपत्तियाँ जब्त की गई।

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