आज है होलिका दहन, जानिए कब है शुभमुहूर्त, आज के दिन भूलकर भी ना करे ये काम

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लाइव पलामू न्यूज: आज यानी गुरुवार 17 मार्च को होलिका दहन है। होलिका दहन प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है और इसके अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को हिरण्यकश्यप ने होलिका की गोद में बैठाकर जिंदा जलाने की कोशिश की थी और इस दौरान होलिका खुद ही जल कर खत्म हो गई थी। उस दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा थी। तभी से होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। होलिका दहन की पूजा शुभ मुहूर्त में करना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि शुभ मुहूर्त में किया गया काम शुभ फल देता है।

होलिका दहन की आवश्यक पूजा सामग्री
  • गाय के गोबर से बनी होलिका
  • बताशे
  • रोली
  • साबुत मूंग
  • गेंहू की बालियां
  • साबुत हल्‍दी
  • फूल
  • कच्चा सूत
  • जल का लोटा
  • गुलाल
  • मीठे पकवान या फल
  • होलिका दहन शुभ मुहूर्त

कब है शुभ मुहूर्त

होलिका दहन 17 मार्च 2022 को शुभ मुहूर्त रात में 9 बजकर 16 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक ही रहेगा. ऐसे में होलिका दहन की पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटे 10 मिनट का ही समय ही है.

होलिका दहन की पूजा विधि

होलिका दहन से पहले विधि-विधान के साथ होलिका की पूजा की जाती है. सबसे पहले होलिका पर हल्दी. रोली और गुलाल से टीका लगाकर फूल, कच्चा सूत, बताशे, मीठी चीजें आदि चढ़ाई जाती हैं. इसके बाद होलिका के चारों ओर 7 बार परिक्रमा की जाती है. और फिर जल चढ़ाएं. मान्यता है कि दहन से पहले होलिका की पूजा बहुत शुभ फलदायी होती है. इससे आपके ग्रहदोष भी दूर होते हैं.

इसके बाद शाम के समय होलिका दहन के समय परिवार के सभी लोग होलिका के चारों ओर इक्ट्ठा बैठकर उसमें गेहूं की बाली, साबूत मूंग को जलती हुई अग्नि में डालते हैं. इसके बाद पैर छूकर बड़ों का आशीर्वाद लें. गेंहू के भुने दाने देने दें. ऐसा करने से आपसी प्रेम बढ़ता है और रिश्तों में मजबूती आती है.

होलिका दहन की लपटें देती है संकेत

उत्तर दिशा- होलिका दहन के वक्त अगर आग उत्तर दिशा की ओर होती है तो, देश और समाज में सुख-शांति बढ़ती है। इस दिशा में कुबेर के साथ दूसरे देवताओं का वास होने से आर्थिक प्रगति होती है। चिकित्सा, शिक्षा, कृषि और व्यापार में उन्नति होती है।

दक्षिण दिशा– होलिका दहन की आग का दक्षिण दिशा की ओर झुकना अशुभ माना गया है। दक्षिण दिशा में होलिका की लौ होने से झगड़े और विवाद बढ़ने की आशंका बनी रहती है। युद्ध-अशांति की स्थिति भी बनती है। इस दिशा में यम का प्रभाव होने से रोग और दुर्घटना बढ़ने का अंदेशा भी रहता है।

पूर्व दिशा– होलिका दहन की लौ पूर्व दिशा की ओर झुके तो, इसे बहुत शुभ माना गया है। इससे शिक्षा-अध्यात्म और धर्म को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही रोजगार की संभावना बढ़ती है। लोगों की हेल्थ में भी सुधार होता है। साथ ही मान-सम्मान भी बढ़ता है।

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पश्चिम दिशा- होली की आग पश्चिम की ओर उठे तो पशु-धन को लाभ होता है। आर्थिक प्रगति भी धीरे-धीरे होने लगती है। इसके साथ ही थोड़ी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका भी रहती है, लेकिन कोई बड़ी हानि नहीं होती है। इस दौरान चुनौतियां बढ़ती हैं लेकिन सफलता भी मिलती है।

होलिका दहन के दौरान न करें ये गलतियां

मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी भी नवविवाहिता को ये अग्नि नहीं देखनी चाहिए। इसे अशुभ माना गया है। इससे उनके वौवाहिक जीवन में दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। होलिका दहन वाले दिन किसी भी व्यक्ति को पैसा उधार देने की मनाही होती है। ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती। और व्यक्ति की आर्थिक समस्याएं बढ़नी शुरू हो जाती हैं। इतना ही नहीं, इस दिन उधार लेने से भी परहेज करें। मान्यता है कि माता-पिता की इकलौती संतान होने पर होलिका दहन की अग्नि को प्रज्जवलित करने से बचें। इसे शुभ नहीं माना जाता।एक भाई और एक बहन होने पर होलिका की अग्नि को प्रज्जवलित किया जा सकता है।

मान्यता है कि इस दिन होलिका दहन के लिए पीपल, बरगद या आम की लकड़ियों का इस्तेमाल न करें। ये पेड़ दै​वीय और पूजनीय पेड़ हैं। साथ ही इस मौसम में इन वृक्षों पर नई कोपलें आती हैं, ऐसे में इन्हें जलाने से नकारात्मकता फैलती है। होलिका दहन के लिए गूलर या अरंड के पेड़ की लकड़ी या उपलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कहते हैं कि इस दिन अपनी माता का आशीर्वाद जरूर लें। उन्हें कोई उपहार लाकर दें, ऐसा करने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा बनी रहती है। किसी भी महिला का भूलकर भी अपमान न करें।

सिटी हेल्प सेंटर

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि www.livepalamu.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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