पांकी का यह विद्यालय नहीं रहा ‘विद्या का मंदिर’, बन गया है ‘अवैध वसूली केंद्र’ पढ़िए पूरी खबर

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रिपोर्ट : नंदन कुमार

लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर: सूबे के सरकारी विद्यालयों में नित्त नए कारनामे सामने आ रहे हैं। कभी मिड- डे – मिल में लापरवाही तो कभी शिक्षकों का विद्यालय नहीं आना। इसी क्रम में पांकी प्रखंड मुख्यालय से 21 किलोमीटर अति सुदूरवर्ती क्षेत्र रतनपुर पंचायत के बिहरा गांव स्थित राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिहरा से किताब वितरण के नाम पर छात्रों से रुपये वसूली का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शिक्षकों द्वारा किताब वितरण मे प्रति छात्र छात्राओं से ₹20 की अवैध वसूली की गई है। वहीं विद्यालय में नि:शुल्क वितरण किए जाने वाले बैग के बदले भी ₹20 प्रति बैग छात्र-छात्राओं द्वारा वसूली की गई है। इसके अलावा कक्षा 1 और 2 के छात्र छात्राओं को यूनिफॉर्म देने के एवज में ₹30 की वसूली की गई है। इस घटना के बाद क्या यह मान लिया जाए कि विद्यालय के आड़ में राजकीय कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय को शिक्षकों ने वसूली का केंद्र बना लिया है?

वहां के शिक्षक पढ़ाई पर कम व वसूली पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं? इतना ही नहीं विद्यालय विकासफंड का भी बंदरबांट किया जाता रहा है। इस संबंध में विद्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि कोई भी कार्य बिना पैसे दिए नहीं होता है। चाहे वह नाम लिखावाना हो चाहे पहचान पत्र वितरण करने का, हमेशा विद्यालय के शिक्षक अवैध वसूली करते हैं। पैसे नहीं देने पर छात्र छात्राओं को उस लाभ उसे वंचित करने की धमकी दी जाती है। यहां तक कि कोरोना काल के मध्याह्न भोजन का राशि छात्र- छात्राओं को देने के लिए आया था।जिसमें 1789 व 2602 रुपए के बदले 600 व 1100 दिया गया है। मौके पर मौजूद ग्रामीण सोमर उरांव ने बताया कि उसके दो बच्चे यहां पढ़ते हैं और दोनों बच्चों को किताब व बैग देने के नाम पर 40 ₹40 शिक्षको द्वारा लिया गया है। वहीं मौजूद ग्रामीण महिला रितो देवी ने कहा कि उसके दो बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं एक बच्चे को विद्यालय के शिक्षकों द्वारा 1100 व दूसरे बच्चे को ₹600 ही दिया गया है।

देखिए क्या कहते है बच्चों के अभिभावक

वहीं विद्यालय में पहुंचे अभिभावक भुनेश्वर उरांव ने कहा कि उसके बच्चों द्वारा सूचना मिली की विद्यालय में कपड़ा वितरण किया जा रहा है। जिसके एवज में ₹30 लेकर शिक्षकों ने विद्यालय में बुलाया है। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि पैसे नहीं देने पर पुस्तक बैग व ड्रेस नहीं देने की बात कही जाती है। जिससे भोले-भाले ग्रामीण मजबूरन पैसे दे देते हैं। वहीं विद्यालय में काफी अनियमितता भी है। छात्र-छात्राओं ने बताया कि मध्याह्न भोजन बहुत कम दिया जाता है। कभी खराब मिलता है, कभी-कभी तो जला हुआ भोजन भी बच्चों को परोस दिया जाता है, और तो और कभी-कभी तो मध्याह्न भोजन मिलता ही नहीं है। इस संबंध में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज राम ने किताब, बैग व ड्रेस देने के नाम पर वसूली की बात स्वीकार करते हुए कहा कि किताब और ड्रेस के बदले छात्र छात्राओं के अभिभावको द्वारा 20 ₹20 लिया गया है जबकि ड्रेस देने के एवज मे ₹30 लिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने विद्यालयों में सभी चीजें नि:शुल्क देने का नियम बना रखा है तो किसकी शह पर यहां के शिक्षक इस तरह अवैध वसूली कर रहें हैं?? क्या उन्हें प्रशासन का भय नहीं है? प्रशासन इस संबंध में क्या एक्शन लेती है इसका भी इंतजार होगा।

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