अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाना ही अधिवक्ता परिषद का मूल उद्देश्य : सुनील मिश्र

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लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर: 17सितंबर 1992 को दंतोपंत ठेंगड़ी ने एक महान उद्देश्य के साथ मात्र दो सौ अधिवक्ताओं को लेकर अधिवक्ता परिषद की स्थापना की थी। उनकी सोच थी कि अधिवक्ताओं का एक ऐसा संगठन बने जिसमें राष्ट्रवादी सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव हो। ये बातें वरीय अधिवक्ता सह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ चालक सुनील कुमार मिश्र ने कही। उन्होंने कहा कि परिषद का ध्येय वाक्य न्यायः मम धर्मः का मतलब ही है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सस्ता, सुलभ एवं शीघ्र न्याय कैसे मिले। इसका चिंतन अधिवक्ता परिषद करता है। इसके लिए समय-समय पर स्वाध्याय मंडल के माध्यम से इससे जुड़े अधिवक्ता अपने को रिचार्ज करते रहते हैं। स्थापना दिवस सह सम्मान समारोह में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम इतने बड़े संगठन से जुड़े हुए हैं और आज परिषद के कार्यकर्ता राष्ट्र के पुनर्निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं परिषद के भीष्म पितामह शिवनाथ अग्रवाल ने भी लोगों को इससे जुड़ाव की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर सतीश कुमार सिन्हा,शिवनाथ अग्रवाल, गोरखनाथ पाण्डेय और सुनील कुमार मिश्र को अधिवक्ता परिषद पलामू में अच्छे कार्य के लिए अंगवस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए अधिवक्ता परिषद पलामू के अध्यक्ष व वरीय अधिवक्ता उमेश्वर प्रसाद सिन्हा ने नयी कमिटि में उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि अभी अनवरत विकास की ओर बढ़ने पर ध्यान केन्द्रित करना है। मौके पर उपाध्यक्ष कृष्णा राम,गोरखनाथ पाण्डेय, दीपक कुमार, रामजन्म तिवारी,प्रकाश रंजन,पायल लाठ, सुप्रिया रंजन, राकेश सिंह, अमित तिवारी, संजय अग्रवाल, सुधीर पाठक, शशि आलोक सिन्हा, रमन रूद्रेश समेत अनेक अधिवक्ता मौजूद थे।

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