मूलभूत एवं आधारभूत सुविधाओं से कोसों दूर है बरवाडीह प्रखंड का अति सुदूरवर्ती एवं दुर्गम क्षेत्र बसा सिंधोरवा गांव

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लाइव पलामू न्यूज/बारवाडीह (मयंक कुमार): बरवाडीह प्रखंड से लगभग 15 किलोमीटर दूर अति सुदूरवर्ती एवं दुर्गम क्षेत्र छेचा पंचायत के सिंधोरवा गांव के लोग आज भी आधारभूत सुविधा एवं मौलिक सेवाओं से कोसों दूर है। हम बात कर रहे हैं बरवाडीह के अति नक्सल प्रभावित एवं अति सुदूरवर्ती क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा बरवाडीह के अंतिम छोर पर बसा छेचा पंचायत अंतर्गत सिंधोरवा गांव का जो प्रखंड के अत्यंत पिछड़ा और अव्यवस्थित क्षेत्रों में गिना जा सकता है।
इस पंचायत में आवागमन का नही है साधन

बरवाडीह प्रखंड के पश्चिम साइड के अंतिम छोर में बसे एक अति सुदूरवर्ती क्षेत्र एवं अति नक्सल प्रभावित गांव है सिंधोरवा जो विकास की आस में अभी तक अपने अस्तित्व को संभाले हुए हैं लेकिन विकास एवं मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो विकास के नाम पर इस गांव में कुछ भी नही है, मानों जैसे वह मृत्यु सैया पर लेटा हुआ है। गांव में जाने के लिए ना ही व्यवस्थित सड़के हैं और ना ही स्वास्थ सुविधाओं के लिए कोई भी प्रबंध। गांव के मुख्य क्षेत्र में जाने के लिए कई पहाड़ा तथा दुर्गम रास्तों से होकर जाना पड़ता है।

पहाड़ो को काट कर ग्रामीणों ने बनाया है रास्ता

इस क्षेत्र के लोगों ने अपनी सुविधा के लिए पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बनाया है लेकिन वो रास्ता इतना सुलभ एवं सुगम नहीं है कि उनकी मूलभूत सुविधाओं एवं मौलिक जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रखंड मुख्यालय से जुड़ सकें। वन विभाग द्वारा कभी कभाल सड़क का मरम्मती तो किया जाता है पर वो बहुत दिनों तक नही टिक पाती है, महीने दो महीनों में सड़क की स्थिती अपनी जगह पर आ जाती है।

आपातकाल में दौरान नही है प्रखण्ड मुख्यालय तक पहुँचने का रास्ता

अगर ग्रामीणों की मानें तो किसी भी तरह की आपातकालीन चिकित्सा सुविधा समेत अन्य कारणों हेतु प्रखंड मुख्यालय आना हो तो उसके लिए उन्हें विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। सड़के इस कदर ख़राब है कि उन्हें मजबूरन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरते हुए प्रखंड मुख्यालय पड़ता हैं। जिससे चिकित्सीय अप्रिय घटना होने की संभावनाएं अत्यधिक बानी रहती हैं।

ग्रामीणों फ्लोराइड युक्त पानी पीने को है मजबूर

कोल क्षेत्र होने के कारण सिंधोरवा गांव के ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर है। आपको बताते चलें कि सिंधोरवा क्षेत्र कोल्ड फील एरिया में आता है जहां कोयले की मात्रा उसके जमीन के नीचे अत्यधिक मात्रा में पाई जाती है जिस कारण फ्लोराइड तथा अन्य हानिकारक तत्व पानी में घुले हुए होते हैं इन्हीं पानी का उपयोग ग्रामीण पेयजल तथा अपने दैनिक जीवन के कार्यों में उपयोग करते हैं जिस कारण पीने से पानी से होने वाले विभिन्न प्रकार के बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीण बताते है कि गांव में जल मीनार तो लगा हुआ है परंतु पानी की गुणवत्ता को जांचने के लिए किसी भी प्रकार का यंत्र स्थापित नहीं किया गया है जिसके कारण उन्हें फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ता है। वहीं ग्रामीण वाल्टर बारला ने कहा कि हमारा गांव सिंधोरवा सालों भर लगभग प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र से कटा रहता है, हमारा गांव सिंधोरवा दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी है। हमारे क्षेत्र का विकास लगभग न के बराबर हुआ है। नही ही स्वास्थ्य संबंधित सुविधाओं का विकास हुआ है न सड़क एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

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