सेक्स वर्कर को परेशान नहीं कर सकती पुलिस: सुप्रीम कोर्ट

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लाइव पलामू न्यूज: सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया है कि अगर कोई सेक्स वर्कर वयस्क है और अपनी मर्जी से काम कर रही है तो पुलिस उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि वेश्यावृत्ति एक पेशा है और यौनकर्मी कानून के तहत सम्मान और सुरक्षा के हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और यूनियन टेरटरीज को आदेश देते हुए कहा कि वे सेक्स वर्कर्स के काम में हस्तक्षेप नहीं करें। कोर्ट ने साफ किया कि पुलिस सहमति से सेक्स करने वाली महिलाओं और पुरुषों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस बात को कहने की आवश्यकता नहीं है कि इस पेशे में होने के बावजूद हर व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक जीवन जीने का पूरा अधिकार है। सेक्स वर्कर्स को समान कानूनी सुरक्षा का भी अधिकार है। सभी मामलों में उम्र और आपसी सहमति के आधार पर क्रिमिनल लॉ समान रूप से लागू होना चाहिए। यह साफ है कि सेक्स वर्कर्स वयस्क हैं और आपसी सहमति से यौन संबंध बना रहे हैं तो पुलिस को उनसे दूर रहना चाहिए। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच (एल . नागेश्वर राव,बी.आर. गवई, ए.एस. बोपन्ना) ने यह फैसला दिया है। कोर्ट ने यह आदेश आर्टिकल 142 के तहत विशेष अधिकारों के तहत दिया ।

कोर्ट ने मीडिया कर्मियों को भी संवेदनशील रहते हुए सेक्स वर्कर की पहचान सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है या उनके ठिकानों पर छापेमारी की जाती है या उन्हें बचाने का अभियान चलाया जाता है तो मीडिया को ना तो उनका नाम पीड़िता और ना ही दोषी के तौर पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनकी कोई फोटो या वीडियो भी नहीं सार्वजनिक करनी चाहिए, जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की तांक-झांक भी अपराध की ही श्रेणी में आता है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब यह साबित हो जाता है कि सेक्स वर्कर व्यस्क है और अपनी मर्जी से सेक्स कर रहा है तो पुलिस को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस छापेमारी करे तो सेक्स वर्कर को परेशान न करें।क्योंकि वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है अपनी मर्जी से व्यस्क का सेक्स करना नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे को उसकी मां से केवल इसलिए दूर नहीं किया जा सकता क्योंकि उसकी मां वेश्या है। वेश्यालयों में अगर कोई नाबालिग बच्चा पाया जाता है, या सेक्स वर्कर के साथ रहते हुए पाया जाता है तो यह नहीं माना जाना चाहिए कि उसे तस्करी कर लाया गया है। सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई कोरोना के दौरान सेक्स वर्कर को आई परेशानी को लेकर दायर याचिका पर कर रहा था।

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