#Palamu : कोयल आजीविका पार्क में पड़ा है 18 लाख का स्कूल ड्रेस। सिलाई बंद होने के बावजूद भी उत्पादकता समूह को भरना पड़ता है 35 हजार रुपये महीना बिजली बिल

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पेटिकोट सिलाई का उचित मेहनताना नहीं मिल रहा है स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को। पार्क में डेढ़ सौ है सिलाई मशीन।

लाइव पलामू न्यूज़/मेदिनीनगर (शिवेंद्र कुमार) : जिला प्रशासन के द्वारा स्थापित किया गया कोयल अजीविका अप्रैल पार्क में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा 18 लाख रुपए का बच्चों का तैयार किया गया स्कूल ड्रेस का खरीदार कोई नहीं मिल पा रहा है। जिससे इन लोगों को आर्थिक रूप से काफी परेशानी हो रही है। गौरतलब है कि तीन-चार साल वर्ष पूर्व जिला प्रशासन के द्वारा चैनपुर प्रखंड परिसर में कोयल अजीविका अप्रैल पार्क स्थापित किया गया था। जहां पर एक उत्पादकता समूह बनाया गया था। उस उत्पादकता समूह के अंतर्गत महिलाएं सिलाई व कढ़ाई का काम करती थी। परंतु पिछले एक वर्षों से इनके द्वारा तैयार किया गया बच्चों का स्कूल ड्रेस यूं ही पड़ा हुआ है। जिसका कोई खरीददार अभी तक नहीं मिल रहा है। खरीददार नहीं मिलने से इनके द्वारा तैयार किया गया स्कूल ड्रेस में जो पैसा लगा है। वह नहीं मिल पा रहा है।

साथ हीं साथ महिलाओं के द्वारा सिलाई किए गए ड्रेस का भी पैसा नहीं मिल पा रहा है। जिससे इन लोगों को आर्थिक क्षति हो रही है। और तो और इन्हें कोई काम भी नहीं मिल पा रहा है। जिससे वहां काम कर रही महिलाएं काफी मायूस है। पेटिकोट सिलाई का उचित मेहनताना नहीं मिल पा रहा है महिलाओं को ड्रेस नहीं बिकने से महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। बेरोजगारी के कारण उन लोगों ने पेटिकोट सिलाई का काम शुरू किया था। परंतु दुकानदारों के द्वारा एक पेटिकोट की सिलाई मात्र 10 रूपये दी जा रही थी। जबकि महिलाओं के द्वारा उस दुकानदार से कपड़ा लाकर यहां सिलाई करने के बाद फिर से उसे दुकानदार के पास देना पड़ता था। जिससे इन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद इन लोगों ने पेटिकोट सिलाई करना भी बंद कर दिया है।

18 लाख का पड़ा हुआ है स्कूल ड्रेस

इस कोयल आजीविका पार्क में महिलाओं के द्वारा तैयार किया गया बच्चों का 18 लाख के करीब का स्कूल ड्रेस पड़ा हुआ है। गौरतलब है कि 19-20 में 56 स्कूलों के द्वारा ड्रेस यहां से मंगवाया गया था। वहीं 2020-21 में 156 स्कूलों ने ड्रेस का आदेश दिया था। परंतु वित्तीय वर्ष 21-22 में किसी स्कूल के द्वारा स्कूल ड्रेस का आर्डर नहीं दिया गया है।


बैंक से लोन लेकर बनाया गया है स्कूल ड्रेस


बच्चों के लिए जो स्कूल ड्रेस बनाया गया है। वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 11लाख रुपए का लोन लेकर कपड़ा मंगवाया गया था। फिर भी महिलाओं ने कोरोना काल में मास्क बेचकर 9 लाख का लोन अभी तक भर चुका है। अभी भी दो लाख का लोन बचा हुआ है। महिलाओं का कहना है कि यदि हम लोगों का यह बना हुआ ड्रेस निकल जाएगा तो हम लोग लोन भी भर देंगे।


35 हजार महीना भरना है बिजली बिल


उत्पादकता समूह की मानें तो कोयल आजीविका पार्क का 35 हजार महीना बिल देना रहता है। जबकि अभी इस केंद्र पर किसी तरह की कमाई नहीं हो रही है। महिलाओं की माने तो उन लोगों का कहना है कि हम लोग बिजली का बिल भरते भरते हीं परेशान हैं।


क्या कहना है डीडीसी का


जिले के उप विकास आयुक्त मेघा भारद्वाज ने प्रेस को बताया कि हम लोगों के द्वारा नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउंसिल को अप्रोच किया गया है। उम्मीद है कि उनके द्वारा प्रपोजल स्वीकार किए जाने के बाद ये लोग स्किल डेवलपमेंट से जुड़ जाएंगे। ड्रेस के बारे में उनका कहना है कि स्कूलों को ड्रेस खरीदने के बारे में बता दिया गया है। डीडीसी ने बताया कि हम चाहते हैं कि यहां की महिलाएं डिग्निटी के साथ काम करें। साथ ही साथ इस केंद्र को पुनर्जीवित करने की भी कोशिश की जा रही है।

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क्या कहना है डीसी का


जिले के उपायुक्त शशि रंजन ने प्रेस को बताया कि नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउंसिल को एक करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया है। ताकि इसका जीर्णोद्धार किया जा सके। स्कूल ड्रेस के बारे में डीसी का कहना है कि एसएमसी को पैसा दिया जा रहा है। जिससे वे लोग ड्रेस की खरीदारी करेंगे।

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