#Palamu बाघिनों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार खर्च करेगी 26 करोड़, एक बाघिन के लिए 10 से 12 स्क्वायर किलोमीटर की चाहिये जगह, 8 गांव के लोगों को लाइ पैला पत्थर गांव में किया जायेगा पुनर्स्थापित

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मेदिनीनगर/शिवेंद्र कुमार : झारखंड के एकमात्र पलामू व्याघ्र परियोजना में बाघिन की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार 26 करोड़ रुपये खर्च करेगी। गौरतलब है कि बाघिनों को प्रजनन क्षमता के लिए किसी भी तरह का मानव व्यवधान पसंद नहीं है। जबकि एक बाघिन को इसके लिए 10 से 12 स्क्वायर किलोमीटर की जगह चाहिये।
जबकि पलामू व्याघ्र परियोजना में 8 गांव ऐसे हैं। जहां पर मानव जाति निवास करती है। यह मानव तब के बसाये गयें हैं। जब सरकार अपने कार्य के लिए लोगों को जंगल में बसने के लिये जमीन देती थी। जिन्हें जंगल में ही बसने के लिए सरकार के स्तर से पट्टा दिया जाता था।

परंतु अब बाघिनों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए उन्हें वहां से पुनर्स्थापित करने की योजना है। जिसके लिए सरकार इन 8 गांव के लोगों को लातेहार जिले के लाइ पैला पत्थर व पलामू के पोलपोल में भूमि भूमि देने पर विचार कर रही है। जिससे कि बाघिनों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में किसी तरह का व्यवधान भी ना हो और जो लोग पिछले कई वर्षों से जंगल में रह रहे हैं। उन्हें भी बसा भी दिया जाये। ऐसे में जो कोर एरिया में अभी मानव रह रहे हैं। उन्हें बरसात के दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वे लोग भी चाहते हैं कि हम लोगों को यहां से किसी दूसरी जगह वन विभाग के द्वारा बसा दिया जाये।


किन-किन गांव के लोग होंगे पुनर्स्थापित

विभाग की माने तो कोर एरिया के तीन गांव को कुजरुम,लाटू व हेनार के जंगल में रहते हैं। वहींं बफर एरिया में रमनदाग, गुट्वा, गोपखाड़, विजयपुर व पंडरा के इलाके में रह रहे लोगों को पुनर्स्थापित किया जाएगा। जबकि कुजरुम, लाटू व हेनार गांव पक्की सड़क से 20 किलोमीटर अंदर है। यहां रह रहे लोगों को बरसात के दिनों में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये लोग पूरी तरह बरसात के दिनों में मुख्यधारा से कट जाते हैं।


क्या परेशानी होती है बाघिनों को प्रजनन में

वन विभाग की माने तो बाघिन हींं एक ऐसी जानवर है जो बिना मानव व्यवधान के प्रजनन करना चाहती है। मानव जाति के रहने से वहां बाघिन के क्षेत्र में कोई जानवर भी नहीं आ पाता है। जिससे बाघिन शिकार के लिए व पानी पीने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नहीं आती है। जिसका नतीजा होता है कि वह कोर एरिया को छोड़कर पूरी तरह अपने क्षेत्र से कई किलोमीटर दूर चली जाती है।


सरकार की क्या शर्त है परिवारों को पुनर्स्थापित करने के लिए
वन विभाग की माने तो जिन परिवारों को पुनर्स्थापित किया जाएगा। उस परिवार को सरकार के द्वारा एकमुश्त15 लाख नगद दिया जाएगा। दूसरी शर्त के अनुसार संबंधित परिवार को 5 एकड़ जमीन विभाग के द्वारा दी जाएगी व साथ ही साथ उस परिवार के लिए एक मकान वन विभाग के द्वारा बनाया जाएगा। जिसमें वे परिवार रह सकते हैं। जहां पर उन्हें आवासीय परिसर के रूप में बसाया जाएगा। वहांं सरकार की ओर से पानी, बिजली, सड़क, हॉस्पिटल व स्कूल की व्यवस्था की जाएगी।


कितने परिवार होंगे पुनर्स्थापित

विभाग की मानें तो दोनों गांव में करीब 210 परिवार रहते हैं। प्रत्येक परिवार को वन विभाग एक यूनिट मानता है। एक यूनिट के तहत माता-पिता व 18 साल तक की उम्र के बच्चों को एक यूनिट माना गया है ।वहीं विधवा व दिव्यांग को भी एक यूनिट के रूप में चिन्हित किया जाता है ।उन दोनों गांव में सभी को मिलाकर 210 यूनिट बनाया गया है।


संबंधित परिवार का होगा मालिकाना हक

जिन दो गांव लोटो व कुजूर के लोगों को उनकी अपनी जमीन के बदले सदर प्रखंड के पोलपोल में जमीन दी जाएगी। उस जमीन पर संबंधित परिवार का मालिकाना हक होगा।


क्या कहना है पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर का

पलामू व्याघ्र परियोजना के डिप्टी डायरेक्टर मुकेश कुमार का कहना है कि सरकार से राशि प्राप्त हो चुकी है। वन भूमि उपयोजना का प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार की अनुमति से इस पैसा से को अभी व्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन के अकाउंट में रखा गया है ।जैसे ही भारत सरकार से उप योजना की अनुमति मिल जाएगी। वैसे ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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