प्यासा ही बता सकता है पानी की कीमत, “वर्ल्ड वाटर डे” पर एक रिपोर्ट

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लाइव पलामू न्यूज:आज वर्ल्ड वाटर डे है। इस मौके पर हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि पानी को बेकार में नहीं बरबाद करेंगे साथ ही साथ पानी को बचाने के हर संभव प्रयास करेंगें। इंसानों ने प्रत्येक संसाधनों की तरह पानी का भी इतना दोहन किया है कि यह संसाधन खतरे में है। जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को वर्ल्ड वाटर डे मनाया जाता है।

प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने का बहुत ही गंभीर परिणाम नजर आ रहा है। धरती पर से पीने योग्य पानी के जलास्त्रोत सूखते जा रहें हैं। लोग वर्षा के जल को भी संचित करने के प्रति भी लापरवाही बरत रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब पीने के लिए पानी मिलना दूभर हो जाएगा। गर्मी शुरू होते ही देश के कई शहरों में पानी के लिए मारामारी शुरु हो जाती है। कई शहरों में तो भू-जल स्त्रोत समाप्त हो चुके हैं। हम अपनी इन कठिनाइयों से भी नहीं चेत रहे हैं। जल स्त्रोतों को सबसे ज्यादा नुकसान प्रदूषण ने पहुंचाया है। हम निरंतर नदी, तालाब, झरनों आदि को प्रदूषित करते आए हैं। इससे हमने उनके अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया।

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सरकार निरंतर इस संबंध में प्रयास कर रही है लेकिन हमारी जागरूकता के बिना सरकार का प्रयास सफल नहीं होगा। हमारे देश में कृषि के लिए व्यापक रुप से पानी का उपयोग किया जाता रहा है। इसलिए जल प्रबंधन अतिआवश्यक है। इसके लिए ड्रिप तकनीक अहम साबित होगा। इस तकनीक में बूंद-बूंद कर पानी को पेड़- पौधों को दिया जाता है जिससे कि जितनी आवश्यकता हो उतना ही जल उन्हें दिया जाए। इससे पानी की बचत होती है।

पानी एक ऐसा संसाधन जो नवीकरणीय है लेकिन ताजा और पीने योग्य पानी इंसान की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। पानी को बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कहते हैं कि पानी की कीमत वही इंसान बता सकता है जो प्यासा है । आइए इस “वर्ल्ड वाटर डे” पर प्रण लें कि पानी को बर्बाद होने से बचाएंगे साथ ही वर्षा का जल संचित करने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसके साथ ही अधिक से अधिक लोगों को पानी संरक्षित करने के लिए प्रेरित करेंगें क्योंकि ” जल है तो कल है”।

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