आइए जानते हैं कामदा एकादशी का महात्म्य

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लाइव पलामू न्यूज: वैसे तो हर मास की एकादशी का अपना महत्व है। चैत्र मास में आने वाली एकादशी का भी अलग महत्व है। इसे कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में एकादशी का अर्थ होता है “ग्यारह” । एक माह में दो एकादशी होती है एक कृष्ण पक्ष की एक शुक्ल पक्ष की। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार कामदा एकादशी 12 अप्रैल को है।

भगवद गीता के अनुसार भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इसी दिन व्रत व उपवास का महत्व बताया था। कामदा एकादशी हिंदी नव वर्ष के शुरुआत में होती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं। कामदा एकादशी के व्रत से ब्राह्मण हत्या का पाप भी धुल जाता है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए। व्रत का पारण गरीबों को भोजन खिलाने के बाद ही करना चाहिए। इससे अक्षय फल प्राप्त होता है। एकादशी का दिन ग्यारह इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रतीक है। 5 इंद्रियां, 5 क्रिया अंग और एक मन । कई बार दो दिन एकादशी तिथि पड़ती है तो ऐसी स्थिति में गृहस्थ के लिए प्रथम दिन और दूसरे दिन साधु संन्यासियों के लिए दूसरे दिन व्रत का नियम है।

कामदा एकादशी तिथि शुरु- 4:30 पूर्वाह्न 12 अप्रैल
एकादशी तिथि समाप्ति – 5:02 पूर्वाह्न 13 अप्रैल

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