हेपटाइटिस या फैटी लीवर दोनों में से कौन है ज्यादा खतरनाक, आइए जानते हैं….

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लाइव पलामू न्यूज: खान पान की गलत आदतों ने लोगों में कई तरह की बीमारियों को जन्म दिया है। इसी क्रम में आज हम बात करेंगे फैटी लिवर और हेपेटाइटिस के बारे में । इनमें क्या अंतर है? कौन सी बीमारी ज्यादा गंभीर है?? फैटी लिवर और हेपेटाइटिस दाेनाें लिवर की गंभीर बीमारियां हैं। ये खराब जीवनशैली और खान-पान गलत आदताें के कारण व्यक्ति काे अपनी चपेट में लेता है। इनमें लिवर धीरे-धीरे अपने कार्य करने की क्षमता में असमर्थ हाे जाता है। देश में लाखाें लाेग हेपेटाइटिस और फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं हजाराें, लाखाें लाेग इन बीमारियाें से अपनी जान भी गंवाते हैं।


जब लिवर की काेशिकाओं या सेल्स में अधिक मात्रा में फैट जमा हाे जाता है, ताे इस स्थिति काे फैटी लिवर कहा जाता है। दरअसल, लिवर में वसा या फैट का हाेना सामान्य है, लेकिन जब लिवर में फैट 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाए ताे इसे फैटी लिवर कहते हैं। इस अवस्था में लिवर सही तरीके से कार्य नहीं कर पाता है।फैटी लिवर दाे प्रकार के हाेते हैं- इसमें एल्काेहॉलिक फैटी लिवर और नॉन एल्काेहॉलिक फैटी लिवर शामिल हैं। एल्काेहॉलिक फैटी लिवर की समस्या उन लाेगाें में देखने काे मिलती है, जाे शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं। इसके अलावा नॉन एल्काेहॉलिक फैटी लिवर वसायुक्त भाेजन और खराब जीवनशैली की वजह से हाेता है। डायबिटीज और माेटापा भी फैटी लिवर का कारण बनता है। वहीं हेपेटाइटिस लीवर की ही एक गंभीर बीमारी है। इसकी वजह से देश में कई लाेगाें की जान चली जाती है। भारत में हेपेटाइटिस की वजह से लिवर की बीमारी सबसे अधिक हाेती है। हेपेटाइटिस में लिवर में सूजन आ जाती है। इसके वायरस पांच तरह के हाेते हैं- इसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई शामिल हैं। हेपेटाइटिस लिवर सिराेसिस और लिवर कैंसर का भी कारण बनता है। हेपेटाइटिस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है, इसलिए इसे वायरल हेपेटाइटिस भी कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार आजकल 100 में से हर 35-40 लोगों को फैटी लिवर की समस्या होती है।वहीं दूसरी तरफ हेपेटाइटिस संक्रमण या चोट के कारण लिवर के ऊतकों की सूजन है। जब एक फैटी लिवर हेपेटाइटिस से जुड़ा होता है, तो इससे लीवर सिरोसिस हो सकता है। इसे एनएएसएच कहा जाता है। हेपेटाइटिस ए और ई स्व-सीमित हैं, जिसमें रोगी 6 सप्ताह के लिए पीलिया से पीड़ित हाेता है और आमतौर पर ठीक हो जाता है। जबकि हेपेटाइटिस बी और सी क्रॉनिक होते हैं, जिससे सिरोसिस और लीवर कैंसर भी होता है। हेपेटाइटिस डायबिटीज राेगियाें में भी देखने काे मिलती है। प्रारंभिक अवस्था में इन दाेनाें बीमारियाें का इलाज संभव है। फैटी लिवर और हेपेटाइटिस दाेनाें के प्रारंभिक अवस्था में इलाज संभव है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर समस्या और भी गंभीर हाे सकती है।लेकिन अगर किसी व्यक्ति काे फैटी लिवर और हेपेटाइटिस दाेनाें एक साथ हाेता है, ताे यह लिवर कैंसर और लिवर सिराेसिस का कारण बन सकता है। यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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