आइपीयू के 144वें अधिवेशन में सांसद बीडीराम ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विषय पर की परिचर्चा

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लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर: पलामू सांसद बीडीराम को भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से अंतर -संसदीय संघ के नुसा दुसा, बाली इंडोनेशिया के लिए पुन: नामित किया गया है। बता दें कि इससे पूर्व भी सांसद को 142वीं व 143वीं अधिवेशन के लिए भी नामित किया गया था। 20- 24 मार्च तक के इस अधिवेशन में सांसद ने अपने भाषण में शिक्षा के क्षेत्र में सूचना और संचार प्रोद्यौगिकी के विषय में परिचर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देती है।

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में न केवल सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों से जुड़े हार्डवेयर उपकरण शामिल हैं, बल्कि डिजिटल सामग्री, इंटरनेट, रेडियो और टेलीविजन जैसे अन्य संचार उपकरण भी शामिल हैं। शिक्षा के क्षेत्र में गति प्राप्त करने के लिए, आईसीटी की भूमिका अहम है। इसके साथ ही उन्होंने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)-सक्षम सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रौद्योगिकी कैसे उभर रही है तथा कैसे (आईसीटी) आधारित शिक्षा सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को प्राप्त करने में मदद कर सकता है जैसे विषयों पर चर्चा की। साथ ही साथ कोविड-19 महामारी के दौरान कैसे स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने आईसीटी आधारित प्लेटफार्मों के साथ आभासी शिक्षण विधियों को अपनाया और शिक्षा की निरंतरता में सहायता की, इस पर भी अपनी बात को रखा।

उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान कैसे स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने आईसीटी आधारित प्लेटफार्मों के साथ आभासी शिक्षण विधियों को अपनाया और शिक्षा की निरंतरता में सहायता की, इस पर भी अपनी बात को रखा। उन्होंने बताया कि आईसीटी को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) में शामिल कर दिया गया है, जो विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि के छात्रों के बीच डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए एक उत्प्रेरक है। स्कूली शिक्षा में आईसीटी पर भारत के राष्ट्रीय नीति 2012 का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए तैयार करना भी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय आईसीटी की क्षमता का लाभ उठाने के लिए ‘सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा पर राष्ट्रीय मिशन‘ (एनएमईआईसीटी) का संचालन किया गया है ताकि सभी शिक्षार्थियों के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली सामग्री मुफ्त में उपलब्ध हो सके।

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आईसीटी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के विशय पर उन्होंने प्रतिनिनिधि मंडल को यह भी बताया कि प्राथमिक स्तर पर, एनईपी शिक्षकों और छात्रों के बीच भाषा की बाधा को पाटने में प्रौद्योगिकी की भूमिका को मान्यता देता है। यह दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा तक अधिक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर देता है। व्यावसायिक और उच्च शिक्षा स्तर में, नीति का उद्देश्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करके 100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करने में तेजी लाना है। इसके अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) को स्टार्ट-अप ऊष्मायन केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है तथा सीखने को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच के रूप में कार्य करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (एनईएफटी) की भी स्थापना की गई है। नीति में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास को तैयार करने के उद्देश्य से एक समर्पित इकाई की परिकल्पना भी की गई है।

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सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (एनएमईआईसीटी) के माध्यम से शिक्षा पर राष्ट्रीय मिशन के तहत जो पहल की जा रही है उसका भी विवरण दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स (SWAYAM)-एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है जो 9वीं से 12वीं कक्षाओं के लिए और अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट स्तरों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान करता है। SWAYAM पर 2769 बड़े पैमाने पर खुले ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) की पेशकश की गई है। SWAYAM को swayam.gov.in पर देखा जा सकता है।

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