झारखंड की नौकरी में अब झारखण्ड वासियों को मिलेगी प्राथमिकता, जनजातीय भाषा को जानना अनिवार्य

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लाइव पलामू न्यूज़/रांची: झारखंड की नौकरियों में अब झारखंडी युवाओं को ही मिलेगी प्राथमिकता, अभ्यर्थियों के लिए झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा और परिवेश का ज्ञान होना भी अब अनिवार्य होगा। झारखंड में अब झारखंड के शिक्षित युवाओं को ही सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जायेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरूवार को हुई कैबिनेट की बैठक में परीक्षा संचालन की पांच नियमावली को सरल करने के साथ साथ तीन संचालन (संशोधित) नियमावली 2021 के गठन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गयी है।

इसके तहत अब राज्य सेवा के विभिन्न स्तर की परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा और परिवेश का ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है। मैट्रिक स्तरीय परीक्षा संचालन नियमावली के अंतर्गत अभ्यर्थियों की न्यूनतम शैक्षणिक अहर्ता में संशोधन करते हुए यह तय किया गया है कि अब अभ्यर्थियों को झारखंड में अवस्थित मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों से न्यूनतम मैट्रिक या दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। लेकिन यह प्रावधान झारखंड की आरक्षण नीति में आने वाले अभ्यर्थियों और अनुकंपा के मामले में शिथिल रहेंगे।

इसका मतलब अगर झारखंड के आरक्षित श्रेणी का कोई अभ्यर्थी अन्यत्र से भी मैट्रिक पास किया हो तो वह परीक्षा से वंचित नहीं रहेगा। पहले केवल मैट्रिक या दसवीं में पास होना जरुरी था. अब राज्य में स्थित मान्यता प्राप्त संस्थान से मैट्रिक या दसवीं पास होना अनिवार्य होगा। ऐसा झारखंड के स्थानीय युवाओं को वरीयता देने के लिए किया गया है. यह संशोधन पांचों परीक्षा संचालन नियमावली और नयी नियुक्ति नियमावली में किया गया है।

कैबिनेट व कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व से ही कर्मचारी चयन आयोग द्वारा यह संशोधन किया गया था कि मैट्रिक और इंटर स्तर पर दो अलग-अलग परीक्षा (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) की जगह केवल मुख्य परीक्षा होगी। अब कार्मिक विभाग की ओर से पांचों परीक्षा संचालन नियमावली के तहत स्नातक स्तरीय सेवाओं के लिए प्रारंभिक परीक्षा को समाप्त करते हुए केवल एक चरण में मुख्य परीक्षा लेने का प्रावधान किया गया है।

पहला पेपर क्वालीफाइंग होगा. हिंदी और अंग्रेजी के इस पेपर में क्वालीफाइंग मार्क्स लाना होगा. इसमें 30 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा, लेकिन इसके अंक मेरिट में नहीं जुड़ेंगे। वहीं पेपर दो झारखंड राज्य की चिन्हित जनजातीय क्षेत्रीय भाषा का होगा. राज्य स्तरीय नियुक्ति के लिए जो परीक्षा ली जाएगी उसमें जनजातीय क्षेत्रीय भाषा के लिए 12 भाषाएं निर्धारित की गई हैं जिसमें 30 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा। पेपर 3 सामान्य ज्ञान का होगा। इसमें भी 30% अंक लाना होगा. यानी उम्मीदवारों को पेपर दो और पेपर तीन में अलग-अलग 30 फीसदी अंक लाने होंगे तभी वह पास होंगे।

इन्हीं पेपर दो और पेपर 3 के अंकों को जोड़कर फाइनल मेरिट लिस्ट यानी मेधा सूची तैयार किया जाएगा। झारखंड से मैट्रिक और इंटर पास लोगों को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जायेगी। एक अन्य संशोधन के मुताबिक झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से जिला स्तरीय जो नियुक्तियां होंगी, उसमें जिला वार जो भाषाएं निर्धारित की गई हैं, वहीं पेपर 2 के तहत चुनना होगा।

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