भारत में IAS अफसरों के 22 प्रतिशत पद खाली, वहीं झारखण्ड में 31% पद खाली, कैडर में नियुक्त करने पड़ रहे पीसीएस अधिकारी

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लाइव पलामू न्यूज/रांची: देश में आईएएस अधिकारियों (Indian Administrative Service Officers) की 22% कमी के कारण राज्यों को कैडर पदों पर गैर-कैडर अधिकारियों(non-cadre officers) की नियुक्ति करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संसद की एक स्थायी समिति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel and Training) से सिफारिश की है कि वह आईएएस अधिकारियों की वार्षिक संख्या बढ़ाए। पिछली बार आईएएस अधिकारियों की वार्षिक भर्ती सिविल सेवा परीक्षा वर्ष 2012 से बढ़ाकर 180 कर दी गई थी। वहीं अब 2022 की सिविल सेवा परीक्षा से प्रत्येक वर्ष आईएएस अधिकारियों की भर्ती की संख्या का निर्धारण करने के लिए कोई उपयुक्त समाधान खोजने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए सरकार द्वारा एक समिति का गठन किया गया है।

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देश में IAS के अनुमानतः1500 पद रिक्त हैं


कर्मियों, लोक शिकायतों, कानून एवं न्याय पर बनी संसद की स्थायी समिति ने बीते सप्ताह संसद में 112वीं रिपोर्ट पेश की थी| इस रिपोर्ट के अनुसार आईएएस अधिकारियों की देश में अधिकृत संख्या 6,746 है, जिसमें 4,682 पद भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से और वहीं राज्य सिविल सेवा से आईएएस कैडर में पदोन्नत अधिकारियों के 2,064 पद शामिल हैं। वर्तमान स्थिति की बात करें तो पोस्टेड आईएएस अफसरों की संख्या 5,231 ही है, जिनमें 3,787 सीधी भर्ती से और 1,444 राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस कैडर में शामिल हुए हैं।

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जम्मू-कश्मीर में सर्वाधिक 57% पद


राज्यवार आंकड़ों की सूची देखी जाए तो भारत में इस समय सर्वाधिक रिक्त पद जम्मू और कश्मीर में है। अकेले जम्मू और कश्मीर में 57% पद खाली हैं।इसके बाद दूसरे पायदान पर है त्रिपुरा जहाँ 40% पद खाली हैं, तो वहीं नागालैंड में 37.2%, केरल में 32% और झारखंड में 31% आईएएस के पद खाली हैं। खाली पदों के सबसे कम प्रतिशत वाले राज्य हैं तमिलनाडु जहाँ कुल अधिकृत संख्या का 14.3%, मध्य प्रदेश में 14.7%, हरियाणा में15.8% और उत्तर प्रदेश में15.9%। संसद की स्थायी समिति द्वारा संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट में साफ साफ कहा गया है कि कुछ राज्यों में गैर-आईएएस अधिकारियों को कुछ मामलों में आईएएस कैडर के पदों पर नियुक्त किया जा रहा है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) कैडर रूल, 1954 (Indian Administrative Service Cadre Rule, 1954) के नियम 9 का उल्लंघन है।

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IAS कैडर में नियुक्त करने पड़ रहे पीसीएस अधिकारी


भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) कैडर रूल, 1954 का नियम 9 राज्यों को गैर-आईएएस अधिकारियों को कैडर पदों पर नियुक्त करने की अनुमति केवल तभी देता है, जब रिक्ति को भरने के लिए उपयुक्त कैडर अधिकारी उपलब्ध न हो। जबकिआईएएस कैडर का अधिकारी उपलब्ध होने पर गैर-कैडर अधिकारी को बदलना होता है। नियम इसकी व्याख्या करता है कि यदि गैर-कैडर अधिकारी को आईएएस कैडर वाले किसी पद पर 3 महीने से अधिक समय तक बने रहना है तो, इसके लिए राज्य सरकार को केंद्र से पूर्व स्वीकृति लेनी पड़ती है।

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DOPT को बढ़ानी पड़ेगी IAS की वार्षिक संख्या


संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “नौकरशाहों की कमी, शायद, राज्यों को कैडर पदों पर गैर-कैडर अधिकारियों की नियुक्ति करने, उन्हें ऐसे पदों पर अनुमत समय सीमा से ज्यादा दिन तक बनाए रखने रखने के अलावा सेवारत अधिकारियों को कई प्रभार देने के लिए मजबूर कर रही है। इसलिए संसद की स्थायी समिति ने डीओपीटी से सिफारिश की है कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईएएस अधिकारियों की वार्षिक संख्या में बढ़ोतरी करे।

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