अगस्त क्रांति में पलामू के पांच भ्राता युगलों ने दिखाया था शौर्य, ‘करो या मरो’ नारा लगाते गए थे जेल (पार्ट -3)

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वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा
लेखक वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा अमर उजाला
गणेश प्रसाद वर्मा-नंद किशोर प्रसाद वर्मा
लाइव पलामू न्यूज: गणेश प्रसाद वर्मा पलामू के क्रांतिकारियों के नेता थे। ये वाराणसी में अपनी बहन के यहां पढ़ने गए थे। यहीं 1930 में ये चंद्रशेखर आजाद के संपर्क में आए और उन्हीं की राह पर चलने लगे। एक बार बम बनाने के दौरान उनके साथी का हाथ उड़ गया तो उन्हें वाराणसी छोड़कर डालटनगंज लौटना पड़ा।
यहां आने के बाद भी उनकी सक्रियता कम नहीं हुई। 1942 में दशहरा के दिन 19 अक्तूबर को भेदिए की सूचना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। गणेश बाबू पर अंग्रेजों ने बम बनाने, वायसराय पर बम फेंकने और अंग्रेजी राज को सशस्त्र क्रांति से उखाड़ने की साजिश रचने के केस चलाए थे। उन्हें इन्हीं आरोपों में सजा भी हुई थी और वह 11 साल जेल में रहे थे।
आजादी के बाद भी वह काफी सक्रिय रहे पर कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आ जाने के कारण नौ फरवरी 1950 को उन्होंने आखिरी सांस ली। नंद किशोर प्रसाद वर्मा अपने बड़े भाई से काफी प्रभावित थे। वह डालटनगंज डाकघर लूटकांड में शामिल थे और इसी आरोप के तहत जेल गए थे। देश की आजादी के बाद नंदा बाबू ने भारतीय रेलवे में अपनी सेवाएं दी थी। रिटायर होने के बाद वे सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहे। उनका निधन 1981 में हुआ था।

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