अगस्त क्रांति में पलामू के पांच भ्राता युगलों ने दिखाया था शौर्य, ‘करो या मरो’ नारा लगाते गए थे जेल (पार्ट – 4)

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नीलकंठ सहाय-ऋषि कुमार सहाय
लाइव पलामू न्यूज: नीलकंठ सहाय की गिरफ्तारी रांची में हुई थी। उस वक्त वे हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेज के छात्र थे और अंग्रेजों के खिलाफ इनके अंदर गुस्सा काफी भरा हुआ था। उन्हें उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब ये सरकार के खिलाफ अपने मित्रों के साथ नारेबाजी कर रहे थे। पहले इन्हें रांची जेल में रखा गया और बाद में हजारीबाग जेल भेज दिया गया। रिहा होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर सरकारी नौकरी में आ गए। रांची से शुरू हुई नौकरी से सहाय जी ने डालटनगंज से अवकाश ग्रहण किया। इसके बाद सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। इनका निधन इसी साल 11 मार्च को डालटनगंज में हो गया।
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ऋषि कुमार सहाय अपने बड़े भाई के साथ मार्च 1940 में रामगढ़ कांग्रेस में गए थे। यहीं से उनके अंदर देश के प्रति अपना सब कुछ न्योछावर करने की प्रेरणा मिली थी। 1942 में जब भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ तो वे भी इसमें कूद पड़े और गिरफ्तार कर लिए गए। पहले डालटनगंज और बाद में हजारीबाग जेल में रखे गए। आजादी के बाद सहाय जी ने पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने लगे। सीसीएल बोकारो से सेंट्रल इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्त होने के बाद ये रांची में रहने लगे। यहीं 25 फरवरी 2012 को इनका निधन हुआ
LONG LIFE CARE HOSPITAL
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