सैकड़ों सखुआ का पेड़ काट जंगल को किया उजाड़, ग्रामीणों का आरोप सब मिलीभगत का नतीजा

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लाइव पलामू न्यूज/गढ़वा: श्रीबंशीधर नगर अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 8 किमी उत्तर पश्चिम में स्थित कुंबा जंगल नगर ऊंटारी अनुमंडल का सबसे खूबसूरत व बड़ा एवं घना जंगल है। इस वन क्षेत्र में कई इमरती एवं बेशकीमती पौधे पाए जाते हैं।वन क्षेत्र में वन विभाग की ओर से प्रत्येक वर्ष लाखों रूपये का पेड़़ लगाया जाता है। यह जंगल चार किमी की परिधि में फैला हुआ है। इसके अलावा जंगल के बीच से नदी गुजरती है जो वन की सुंदरता में चार चांद लगाती है। जंगल में स्थित नदी में हमेशा पानी रहने के कारण यहां जंगली जानवर रहते हैं। केंदु पत्ता के सीजन में कुंबा वन क्षेत्र के लिये लाखो रूपये की बोली लगाई जाती है। वहीं सरई एवं महुआ से भी विभाग को अच्छे खासे राजस्व की प्राप्ति होती है। जानकारी के मुताबिक कुंबा वन क्षेत्र में भारी मात्रा में तेन का पेड़ है। बेहतर किस्म के तेन का पेड़ होने के कारण कुंबा जंगल के लिये लाखों रूपये की बोली लगाई जाती है। केंदु पत्ता के सीजन में जंगल से व्यापक पैमाने पर केंदु पत्ता की तोड़ाई की जाती है, जिससे विभाग को लाखों रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है। वहीं ग्रामीणों को भी पत्ती तोड़ाई करने के एवज में पैसा मिलता है।

इस जंगल पर माफियाओं की नजर पड़ गई है। वे जंगल को चट करने में दिन रात लगे हुए हैं। माफियाओं ने दिन के उजाले में कुंबा वन क्षेत्र में बेशकीमती सखुआ के सैकड़ों पेड़ों को काट कर जंगल को उजाड़ कर दिया गया है। आश्चर्य की बात तो तह है कि वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस वन क्षेत्र में सखुआ, महुआ, सीधा, धौरा, शीशम, समेत कई प्रकार के बेशकीमती पेड़ हैं। यह वन क्षेत्र हिरन, नील गाय, सुअर, सांभर, तेंदुआ समेत कई प्रकार के जंगली जानवरों का निवास स्थान भी हैं। वन क्षेत्र में पेड़ की मोटाई चार से लेकर छह फीट से अधिक तक की है। पेड़ मोटा एवं सघन होने के कारण जंगल पर लकड़ी माफियाओं की नजर है और मौके का फायदा उठाते हुये लगातार पेड़ों की कटाई जारी है। माफिया सैकड़ों सखुआ के पेड़ काटकर ले गये। उल्लेखनीय है कि केन्द्र एवं राज्य की सरकार पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने के करोड़ो रूपये खर्च कर पेड़ लगाने एवं पेड़ बचाने के लिये जागरूकता अभियान चला रही है। कुम्बा सुरक्षित वन क्षेत्र से कीमती लकड़ी की कटाई के संबंध में पूछे जाने पर रेंजर प्रमोद कुमार ने बताया कि जंगल से पेड़ माफियाओं ने नहीं महिलाओं ने काटा है। जिसमें से कुछ सखुआ के लकड़ी को जब्त किया गया है। वे स्वयं मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरूद्ध कड़ी कारवाई की जायेगी। कुंबा खुर्द वन क्षेत्र में भारी मात्रा में पेड़ों की कटाई से वन सुरक्षा समिति व वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। इतने पेड़ काट लिए गए और विभाग को खबर नहीं हुई, यह बात हाजमा बिगाड़ने के लिए काफी है। बता दें कि पूर्व में सरकार की ओर से वन संरक्षण एवं वन विकास के लिये कुंबा वन सुरक्षा समिति को उत्कृष्ट वन सुरक्षा कार्यों के लिये पलामू प्रमंडल का दूसरा एवं गढ़वा जिला का पहला पुरस्कार भी दिया जा चुका है।

वहीं इस मामले पर दबे जुबान से ग्रामीणों ने कहा कि रक्षक ही भक्षक है। वन विभाग के अधिकारी एवं वनकर्मी मिलकर लकड़ी को कटवाते हैं और मोटी रकम वसूलते हैं। वे लोग नहीं चाहेंगे तो वन नहीं कटेगा। खबर बाहर आने पर रेंजर प्रमोद कुमार ने रविवार को कुंबा खुर्द वन क्षेत्र का निरीक्षण किया और वस्तुस्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने लगभग एक दर्जन सखुआ की बल्ली जब्त की है। रेंजर ने कहा कि कुंबा खुर्द में महिलाओं ने सखुआ के पेड़ को काटा है। जिन्हें चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पूरे जंगल का मुआयना कर क्षति का आकलन किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान फॉरेस्टर प्रमोद कुमार यादव, वनरक्षी मरियानुस कच्छप आदि उपस्थित थें।

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