आजादी की अलख जगाने गांधी जी पहुंचे थे डालटनगंज, वंदेमातरम के नारे से हुआ था स्वागत

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लेखक वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा अमर उजाला

लाइव पलामू न्यूज़: डालटनगंज के लोगों को उस दिन पूस की कड़कड़ाती ठंड कंपा नहीं रही थी। शहर ही नहीं पूरे पलामू जिले के गांवों के लोग एक अलग तरह की ऊर्जा की ओर खिंचे चले आ रहे थे। यह ऊर्जा और कोई नहीं मोहन दास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी थे। यूं तो कैलेंडर में यह तारीख 11 फरवरी 1927 दर्ज है पर गांधी जी के सम्मान में यहां की जनता ने जो सम्मानपत्र सौंपा था उस पर ‘पौष शुक्ल 8, 1983 वि.’ लिखा हुआ है। आजादी की लड़ाई के अगुआ का शहर में दो जगह स्वागत किया गया था। एक जगह के सम्मानपत्र में ‘पलामू की दरिद्र जनता’ लिखा हुआ है तो दूसरे में ‘सदस्य, डालटनगंज म्युनिसिपलबोर्ड’। यहां आने पर गांधी जी मारवाड़ी सार्वजनिक हिंदी पुस्तकालय भी गए थे।
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‘ गांधी जी ने रेलवे स्टेशन के नजदीक मैदान में हजारों लोगों को संबोधित किया और आजादी की लड़ाई में उनसे सहयोग की अपेक्षा की। जवाब में लोगों ने ‘वंदेमातरम’, ‘भारत माता की जय’, ‘गांधी जी की जय’ के नारे लगाए और उन्हें हरकदम पर साथ देने का वचन दिया। इसका परिणाम पलामू में चले स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों से लगाया जा सकता है। यहां के लोगों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन से लेकर 1942 के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। जिस मैदान में सभा हुई थी, उसे गांधी मैदान के नाम से जाना जाता है।

गांधी जी की यात्रा की चर्चा करने पर स्वतंत्रता सेनानी स्व. नीलकंठ सहाय ने कहा था, ‘मेरे पूज्य पिताजी (जयवंश सहाय) स्वागत समारोह में मौजूद थे। वह डालटनगंज में वकालत करते थे। मेरे पिताजी की लाइब्रेरी में इस बात का प्रमाण मौजूद है कि गांधी जी कब डालटनगंज आए थे।’ डालटनगंज दूरदर्शन के इंटरव्यू में सहाय जी ने गांधी जी की यात्रा की दो तस्वीरें भी साझा की थी। इन्हें दिखाते हुए उन्होंने कहा था, ‘पूज्य पिताजी की लाइब्रेरी में महात्मा गांधी का जो फोटो रखा था उसे कीड़ा खा गया था। उसको साफ करके हमलोग ठीक से रखे हैं। पहले जमाना की गाड़ी है, तस्वीर वहीं की है।’ बताया जाता है कि गांधी जी काशी से ट्रेन से डालटनगंज आए थे। महात्मा गांधी के डालटनगंज आने पर शहर का माहौल कैसा रहा होगा और लोग किस तरह से उत्साहित होंगे इसकी साफ झलक उन्हें म्यूनिसिपल बोर्ड में दिए गए सम्मान पत्र से होती है। ‘वन्देमातरम्’ से शुरू इस ‘अभिनन्दनपत्रम’ को भारत को प्रजातंत्र शासन व स्वराज का ही निरंतर पाठ देनेवाले संसार के सर्वश्रेष्ठ पुरुष महात्मा गांधी की सेवा में प्रस्तुत किया गया था।

इस अभिनंदन पत्र में लिखा गया था, ‘हमारे इस छोटे से शहर में, पढ़े लिखे वा सुशिक्षित कहे जानेवालों की संख्या अधिक नहीं, और न उद्योग धंधों की ही अधिकता है, यही कारण हैं कि हम आप को अपनी ‘भरी पूरी थैली’ से संतुष्ट नहीं कर सकते, और न हममें उस स्वार्थत्याग की मातरा है जो हमें ‘त्याग’ या दान का सुंदर व समुचित पाट दे सके। हमें तो प्रसन्नता इसी बात की है कि आज हम अपने बीच एक ऐसे आदर्श त्यागी को देख रहे हैं जिसके लिये देशसेवा व जगत हित के नाते ‘त्याग’ ही ेक मात्र परम तप है। परम पिता परमेश्वर हम में वह शक्ति प्रदान करने कि जिससे हम भी आप के इस आदर्श ‘त्याग’ व्रत का पाठ कर सकें।’

कोई भी व्यक्ति डालटनगंज आए और उसके सामने पलामू की गंगा कोयल की चर्चा न हो यह संभव ही नहीं है। देखिए, अभिनंदन पत्र में क्या लिखा है-‘भगवन! हमारी यह डालटनगंज की म्युनिसिपलिटी सुरम्य ‘कोयल नदी के तट’ पर साढ़े तीन वर्गमील में एक अपूर्व शोभा धारण करती है और हमें इस बात का पू्र्ण विश्वास है कि आप भी हमारी इस ‘वनभूमि’ के वनविहार में विशेष आनन्द लाभ करेंगे।’ पत्र के आखिरी में लिख गया है, ‘हम डालटनगंज म्युनिसिपलिटी के सदस्यगण अपने इस शहर में आपका सहर्ष सादर व सप्रेम स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि वह दिन दूर नहीं है कि जब हम आपके द्वारा बताये हुए मार्ग पर चलकर अपने इस प्रजातंत्र शासन को सफल बनाने में प्रयत्नशील और समर्थ होंगे।’ इस पत्र में गांधी जी को म्युनिसिपलिटी के गठन से लेकर वर्तमान स्थिति तक की जानकारी दी गई थी।


गांधी जी को दिए गए दूसरे अभिनंदन पत्र की शुरुआत भी ‘वन्देमातरम्’ से हुई है।

इसे ‘संसार के सर्वश्रेष्ठ पुरुष महात्मा गांधी की सेवा में’ प्रस्तुत किया गया है। इसमें गांधी जी को ‘गो’ माता के अनन्य सेवक, भारत के ‘गोपाल’ बताते हुए लिखा गया है, ‘ मृत्यु भय से अभय करने वाले व भारत के ग्वाल बाल, भारतीय बच्चों के परम दुलारे लाड़ले कर्मवीर मोहन! राष्ट्रीयता के नाते, भारत को पराधीनता के पंक से हटाकर अखिल भारतवर्ष को ही परम स्वतंत्र करने वाले व भारतीयों को स्वाधीनता का पाठ देने वाले, देवताओं को भी दुर्लभ ब्रह्मास्त्र ‘असहयोग’ के प्रवर्तक तथा सत्याग्रह के पथप्रदर्शक दीनानाथ दीनबंधु महात्मा गांधी! भारत की एक मात्र राष्ट्रभाषा ‘हिन्दी’ को अपनाकर आपने हमारे साथ जो सहानूभूति व समदर्शिता का प्रेमपूर्ण बर्ताव किया है, वह हम भूल नहीं सकते!
जिसे हम अपने परम प्यारे, आराध्य व उपास्यदेव की तरह अपना इष्टदेव समझे हुए थे, जो इस समय हमारे सुख दुख का एकमात्र ‘साथी’ बना हुआ हामरे ही आत्मकल्याण के लिये अपने स्वार्थ का त्याग की वेदी पर बलिदान कर चुका है, उसे पाकर हमारा हृदय गदगद हो भर आया है। हममें इसनी शक्ति नहीं कि आपका ‘गुणगान’ कर सकें। अतएव, हम ‘पर्ण पुष्पं फलं तोयं’ की तरह ‘चारि चावर सुदामा के’ आपकी भेंट करते हैं, ‘हृदय’ ही हमारा एक मात्र परम धन है आप इसे सहर्ष स्वीकार कीजिये!’ बताया जाता है कि यहां लोगों ने उन्हें कुछ रुपये भी आजादी की लड़ाई में सहयोग के लिए दिए थे।
RAKESH MEMORIAL HOSPITAL
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महात्मा गांधी को पलामू में उद्योग धंधों की कमी की जानकारी दी गई थी। यहां की गरीबी के बारे में बताया गया था। छोटानागपुर को खद्दर का भंडार बता कर उनका ध्यान इस उद्योग की ओर आकृष्ट किया गया था। अभिनंदन पत्र में एक जगह लिखा गया था, ‘देश दरिद्र है, अशिक्षित और दरिद्र देशों का सिरताज छोटानागपुर और दरिद्र देशों के सिरताज के माथे का फूल पलामऊ जिला है। अब तो हमारे पास लाह और तेलहन के सिवा और कुछ भी नहीं रहा। दरिद्रता ने इस तरह धर दबाया है कि, अपने अन्यान्य प्रान्तों के सस्ते समझे जाने वाले खद्दर भी हम नहीं ले सकते। हमारे जिले में खद्दर का नाम भी नहीं।
हमारे इस जिले में कपास की खेती के लिये ‘क्षेत्रों’ को ना चर्खे के लिए काठ या लकड़ी की कमी नहीं, पर कमी है संगठन की ही, हम संगठन कर सकते हैं, पर संगठन के लिय भी द्रव्य का अभाव है। कोई सच्चा पथप्रदर्शक भी हमारे जिले में नहीं है! अतएव यदि कहीं विशेष आवश्यकता आपके विशेष कृपा या दृष्टिकोण की है तो हमारे ही इस दरिद्रता से चिरपीड़ित पलामू जिले में।’ आज देश का स्वतंत्रता दिवस है। अंग्रेजों से मुक्ति का दिन, देश में प्रजा के राज का दिन। आइए, महात्मा गांधी को याद करें, पलामू के सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करें। एक नए पलामू और देश के पुनर्निमाण का संकल्प लें।


नोट-अभिनंदन पत्र स्वतंत्रता सेनानी स्व. नीलकंठ सहाय के पुत्र अमित सहाय ने उपलब्ध कराया है जबकि गांधी जी की तस्वीर डालटनगंज दूरदर्शन के इंटरव्यू का स्क्रीन शॉट है। दोनों अभिनंदन पत्र डाउनलोड करके पढ़ा जा सकता है।

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