इप्टा के स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन

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लाइव पलामू न्यूज/मेदिनीनगर: सन 1942 में बंगाल की जनता अकाल की विभीषिका को झेल रही थी। अकाल पीड़ित लोगों के सहयोग के लिए कलाकारों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों ने अपनी एकजुटता कायम की और सहयोग के लिए निर्णय लिया। अपने निर्णय के आधार पर कलाकारों की टीम भारत की यात्रा पर निकल पड़े। अपनी यात्रा के दौरान वामीक जौनपुरी द्वारा लिखित गीत भूखा है बंगाल रे साथी भूखा है बंगाल प्रस्तुत करते हुए अकाल पीड़ितों सहयोग के लिए संसाधन जुटाया और अकाल पीड़ितों तक पहुंचाया। कलाकारों का वही दल 25 मई 1943 को सांगठनिक स्वरूप में सामने आया। जिसका नामकरण डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा ने इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन किया। इस तरह 25 मई 1943 से इप्टा की यात्रा शुरू हुई। आज इप्टा ने अपना 79वां वर्ष पूरा किया और 80 वें वर्ष में प्रवेश किया । यह बात झारखंड इप्टा के महासचिव उपेंद्र कुमार मिश्र ने 80 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित नुक्कड़ सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रारंभ में कचहरी चौक से इप्टा के रंगकर्मियों ने कलाकारों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों का जुलूस निकाला। इस जुलूस में मिशन समृद्धि के बच्चे, अंशु आर्ट के चित्रकार, नई संस्कृति सोसायटी के कलाकार एवं पत्रकार शामिल थे। इस जुलूस में विशेष रुप से शीला श्रीवास्तव, आशा शर्मा, वैजयंती गुप्ता, प्रोफेसर सरिता श्रीवास्तव, सुरेश सिंह, मनीष कुमार सहित इप्टाकर्मी शामिल थे। जुलूस का नेतृत्व शशि पांडे कर रहे थे। जुलूस छहमुहान होते अंबेडकर पार्क पहुंची। वहां पहुंचने के बाद कलाकारों और दर्शकों के साथ इप्टा के वरिष्ठ काष्ट कलाकार प्रेम भसीन ने इप्टा के गौरवशाली इतिहासक नीले झंडे का झंडोत्तोलन किया।

इसके बाद इप्टा के कलाकारों ने शहीद गीत गाकर सुंदर दुनिया के निर्माण में अपने जीवन को समर्पित करने वाले कलाकारों और बुद्धिजीवियों को सलाम किया। तत्पश्चात मिशन समृद्धि के बच्चों ने कैफ़ी आज़मी की नज्म ” झूठी मोहब्बत झूठी अदाएं/ झूठों से दिल न लगा ” को लघु नाटिका के रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। इस नाटिका में राकेश, छोटू, माया, रिया, मनीषा, सुषमा, रितु, प्रियंका, उत्तम, प्रीति एवं पम्मी ने सराहनीय भूमिका अदा की। इसके बाद मासूम आर्ट ग्रुप के द्वारा सैकत चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित एवं मुनमुन चक्रवर्ती व कामरूप सिन्हा के निर्देशन में डायन नामक नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक में कामरूप सिन्हा, अमर कुमार भांजा, आकर्ष प्रताप, राज प्रतीक पाल, मुनमुन चक्रवर्ती, कनकलता तिर्की, मनीषा भारती, आसिफ खान, गिरेन्द्र यादव, सूरज शर्मा, विवेक कुमार आदि कलाकारों ने दमदार अभिनय किया।


इसके बाद इप्टा के कलाकारों ने सफदर हाशमी द्वारा लिखित नाटक समरथ को नहिं दोष गुसाईं उर्फ महंगाई की मार प्रस्तुत किया। नाटक की प्रस्तुति के पूर्व प्रेम प्रकाश ने कहा कि इस नाटक को पलामू इप्टा ने 1000 प्रस्तुतियां पलामू के विभिन्न गांव में किया है। इस नाटक ने कई कलाकारों को लोकप्रिय भी किया। नाटक में प्रेम प्रकाश, रविशंकर, अजीत कुमार, संजीव कुमार संजू एवं घनश्याम कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। कार्यक्रम के दौरान इप्टा के कलाकारों ने कई जनवादी गीत प्रस्तुत किए। गीतों की प्रस्तुति के दौरान ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा के मुख्य गीत हम भारत से नफरत का हर दाग मिटाने आए हैं को भी प्रस्तुत किया। इसी के साथ आयोजन स्थल पर अंशु आर्ट के आशा शर्मा के निर्देशन में तैयार किए गए प्रेम पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। चित्र प्रदर्शनी में आशा शर्मा के साथ निकिता तिवारी, रक्षा तिवारी, नसरीन परवीन, शिव कुमार मेहता, अमित कुमार मेहता, तजल्ली परवीन, ईशा कश्यप, मिशा रानी, सपना सहगल, सचिन पटेल, आदर्श राज, पूनम तिवारी, तनु कुमारी, रानी कुमारी, यशमय द्वारा सृजित चित्र लगाए गए थे। चित्र प्रदर्शनी इस कार्यक्रम का आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से हम होंगे कामयाब गीत प्रस्तुत किया गया। समापन के पश्चात कलाकारों ने इप्टा जिंदाबाद का नारा लगाते हुए संविधान की रक्षा का संकल्प लिया और नारा लगाया संविधान की रक्षा कौन करेगा हम करेंगे हम करेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में रवि शंकर, शशि पांडे, अजीत कुमार, राजीव रंजन, समरेश सिंह, भोला, घनश्याम, निसाद खान, संजू सहित कई लोग सक्रिय थे। मौके पर केडी सिंह, सुरेश सिंह, पंकज श्रीवास्तव, शिव शंकर प्रसाद, शीला श्रीवास्तव, वैजयंती गुप्ता, वीणा गुप्ता, अहिल्या गिरी, प्रोफेसर सरिता कुमारी , शब्बीर अहमद, प्रसिद्ध राम, पंकज लोचन, सैकत चट्टोपाध्याय, अजीत पाठक, रुचिर तिवारी एवं कुलदीप कुमार सहित अन्य सुधि दर्शक उपस्थित थें।

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