हर भिखारी के पीछे कुछ कहानी होती है, इन दो माताओं ने सुनाई अपनी आपबीती

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डॉ आराधना कुमारी
लेखिका एवं समाजसेवी

लाइव पलामू न्यूज : किसी ने ये सही ही कहा है , जलील मत करना किसी गरीब को वो सिर्फ भीख नही मांगते बल्कि आपके द्वारा दिये गए पैसा या अन्य वस्तुओं के बदले सबसे बड़ी चीज वों दुआ भी देते है। हर भिखारी के पीछे कुछ कहानी होती है, वही कुछ कहानी मैं आपलोगो के साथ साझा कर रही हूँ । मैं अपने शहर के साई मंदिर पूजा करने को गई थी, वंहा कुछ भिखारी थे , मैं लगभग 7 भिखारी लोगो से मिली बहुत अच्छा अनुभव हुआ। मुझे ये जानने की उत्सुकता भी थी की क्या वाकई भिखारी जन्म से ही भिखारी होता है , या उनकी पीढ़ी भी ऐसे ही है शुरू से भिखारी होती है , या फिर भिखारी का एक अपना जात होता है ! न जाने कई सवाल मेरे मन में ऐसा कब से था। मैं जो तस्वीर साझा कर रही हूँ वो हमारे होमटाउन झारखण्ड के रांची शहर की है।
कुछ भिखारी लोग लोहरदगा और कुछ लोग आस पास रांची शहर के ही लोग थे , जिनके साथ मैं बातचीत कर रही थी उन्होंने कहा हम लगभग 70 के उम्र के है और दूसरे वाले ने कहा हम लगभग 67 की उम्र के है बेटी , और ये झारखण्ड के लोहरदगा शहर के है। उनके इस सरल स्वभाव से मुझे थोड़ा और बात करने का उत्सुकता हुई !! मैं पूछा आप भिखारी क्यों है , क्यों भीख मांगते हो !! तब उन्होंने बताया , इनके भिखारी बनने की पीछे की कहानी ये है की उनके पास न ही कोई अपनी जमीन है जंहा वो खेती कर सकते है , न ही अपना कोई स्थाई घर जंहा वो रह कर जीवन वापन कर सकते है ! उनमे से एक की एक लड़का और एक लड़की है, दूसरी की दो लड़की है ! बेटी की जैसे तैसे ये लोग शादी की थी और बेटे के भी उन्होंने जैसे तैसे शादी कर दी ! फिर मैंने पूछा बेटा और बेटी आपको घर में नहीं रख सकते है क्या जो सड़क में ऐसे भीख मांग रहे हो।
तब उन्होंने कहा ” बेटी मांग कर खाना कोई गलत बात थोड़ी न है ” , पूरी जीवन तो हम दूसरे के लिए खेतों में काम किए उससे जो मिलता था बच्चा को पाले और अपना पेट भरे , अब हमारा शरीर उस लायक ही नहीं रहा जंहा हम कुछ काम करके अपना जीवन चला सकते है। और उनके बच्चे भी जैसे तैसे अपना जीवन वापन कर रहे है , उनमे से एक के बेटे रिक्से चलते है रोज के वही 50 से 100 कमाते है उनके भी २ बच्चे और पत्नी और वो खुद है , अब ये जरा गौर करनी वाली बात भला दिन के अगर हम दिन के 100 रूपए भी उनके कमाने का पकड़ते है तो क्या उनका पूरा परिवार पेट भर खाना खा पता होगा इस महंगाई में , भला सोचिए रहते कैसे होंगे, पहनते क्या होंगे , बच्चे कैसे होंगे.? न जाने कई सवाल आ गए मन में और उनकी मज़बूरी भीख मांगना कैसे बन गई !!
और अंत में उन्होंने बोला बेटी 5 साल में कोई ऐसा मुँह से बात नहीं किया आज न बड़ी अच्छा लगा की कोई तो है जो हमनी के समझता है और बेटी “आजतक हमनी कहिनो फोटो न खिचवली ही तू लेभी का हमनी के साथ में एक अपन याद के लिए हमनी के फोटो ” मानो ये बात सुनकर लगा जैसे कोई अपने ही बुजुर्ग हमलोगो के इंतज़ार में वंहा बैठे हो। पता नहीं आप लोग में से जो भी इस कहनी को पढ़ रहे कृपया 1 मिनट्स जरूर सोचिएगा इसके बारे में , क्या हमारा ये फर्ज नहीं बनता है जो हमारे लिए इतना काम की उनको हम एक टाइम का खाना दे सकते है, अगर हम सब मिलकर सिर्फ और सिर्फ 1 लोगो का ध्यान रखे तो “क्या हमारा भारत में गरीबी रेखा कम नहीं हो सकती है “? अब समय बदलवा का है , अगर आप सिर्फ अपने ही बारे में सोचते है तो देश का विकास सिर्फ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री नहीं कर सकते है। हम सब लोगो को एक कदम आगे आने की जरुरत है !!

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