पीआईबी-आरओबी, रांची और एफओबी, डाल्टनगंज के संयुक्त तत्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव: स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की भूमिका विषय पर वेबिनार का आयोजन

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लाइव पलामू न्यूज़/मेदिननीगर : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पीआईबी-आरओबी रांची और एफओबी डालटनगंज के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को आजादी का अमृत महोत्सव: स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की भूमिका पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार को बतौर अतिथि वक्ता संबोधित करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एसएन मुंडा ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के जिरए हम झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। भारत ने आजादी के इन 75 सालों में काफी तरक्की हासिल की है और अगले 25 वर्षों में हम दुनिया के शीर्ष देशों में होंगे। युवाओं को सशक्त और नए भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए आगे आना चाहिए और स्वतंत्रता सेनानियों की कुबार्नियों से सीख लेनी चाहिए। अंग्रेजों ने अपनी चतुराई के बल पर फूट डालो और शासन करो की नीति अपनाकर हमारे देश को खोखला करते चले गए और हमें गुलामी की जंजीरों में बांध दिया। आज के समय में हर नागरिक को यह चिंतन करने की जरूरत है कि हम क्यों पराधीन हुए।

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आदिवासियों की सोच हमेशा से स्वतंत्र रही है। तिलका मांझी, चेरो आंदोलन, नीलांबर-पीतांबर का आंदोलन, तमाड़ विद्रोह यह दर्शाता है कि स्वतंत्रता के संघर्ष में आदिवासी हमेशा आगे रहे हैं। जल, जंगल जमीन आदिवासियों की संस्कृति का हिस्सा रहा है, अंग्रेज इसे छीनना चाहते थे जो आदिवासियों को बर्दाश्त नहीं था। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी-आरओबी रांची के अपर महानिदेशक श्री अरिमर्दन सिंह ने कहा कि आदिवासियों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजी सेना से मुकाबला करके उनकी पराधीनता न स्वीकार करना उनकी दिलेरी का परिचायक है। श्री सिंह ने कहा कि आज हम तकनीक संपन्न युग में जी रहे हैं ऐसे में युवाओं को चाहिए कि तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आजादी का लक्ष्य कैसे पाया गया और 75 वर्षों की भारत की उपलब्धियों को लोगों के बीच प्रचारित करें। इससे पहले वेबिनार का समन्वय कर रहे क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री गौरव पुष्कर ने पॉवर प्वाईंट प्रेजेंटशन के माध्यम से झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पर संक्षिप्त ब्योरा देते हुए कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के जरिए भारत सरकार का यह प्रयास है कि कम ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में युवाओं को जानने का मौका मिले। श्री पुष्कर ने युवाओं से RASHTRAGAAN.IN वेबसाइट पर जाकर युवाओं से राष्ट्रगान गाते हुए वीडियो अपलोड करने की भी अपील की।

वेबिनार को संबोधित करते हुए रांची विश्वविद्यालय के पीपीके कॉलेज बुंडू के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. सुभाष चंद्र मुंडा ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहला विद्रोह आदिवासियों ने ही किया था। तत्कालीन आदिवासी शासन व्यवस्था में टैक्स का प्रावधान नहीं था, लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद उन्होनें तरह-तरह के टैक्स लगाने शुरू कर दिए जो आदिवासियों के विद्रोह का प्रमुख कारण बना। झारखंड का यह क्षेत्र कोलकाता के नजदीक था और अंग्रेजों का मुख्यालय कोलकाता में था, इसलिए यहां उनके पांव सन् 1766 से ही जमने शुरू हो गए थे। ऐसे में कहा जाए तो तकरीबन 200 सालों तक अंग्रेजों का विरोध आदिवासियों ने किया। जमीन नीलामी, सांस्कृतिक हमले, हड़िया पर टैक्स ने कई कोल विद्रोह, चुआड़ विद्रोह को जन्म दिया। बिरसा मुंडा और गया मुंडा ने संयुक्त विद्रोह किया लेकिन पारंपरिक हथियारों के कारण अंग्रेज भारी पड़े और कई लोगों की शहादत हुई। इसके बाद अन्य सेनानियों ने इन विद्रोहों से प्रेरणा लेते हुए स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाया।

बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा के प्रबंधन विभाग के सहायक व्याख्याता डा. प्रदीप कुमार मुंडा ने कहा कि विश्व में शोषण के खिलाफ और भारत में स्वाधीनता के लिए पहला विद्रोह आदिवासियों ने किया है। तत्कालीन महाराजा मदरा मुंडा की शासन व्यवस्था में टैक्स का कोई प्रावधान नहीं था, पर अंग्रेजों ने आते कई सारे टैक्स लादने शुरू कर दिए, जो कि आदिवासियों को नागवार गुजरी। आदिवासी सामूहिकता के परिचायक हैं और अंग्रेज इसे खंडित करना चाहते थे। आदिवासी प्रकृति प्रेमी हैं, प्रकृति से दूर करने से उनका अस्तित्व संकट में आ जाएगा। आज जरूरत है कि सामूहिकता में विश्वास की भावना सभी में जागृत हो और आदिवासी समाज को मुख्य धारा में माना जाए।

नेहरू युवा केंद्र के जिला युवा अधिकारी श्री पवन कुमार ने कहा कि आदिवासी हमेशा से प्रकृति से जुड़कर रहते हैं। प्रकृति की रक्षा उनकी आदतों में शुमार होती है। आज युवाओं को भी प्रकृति की रक्षा के लिए आदिवासियों से सीखने की आवश्यकता है कि पर्यावरण कैसे बचाया जाए। स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों का योगदान अमूल्य है, देश के हर युवा को अपने देश पर गर्व होना चाहिए। श्री कुमार ने कहा कि भारत एक विकासशील देश है और यह युवाओं पर निर्भर है कि आने वाले 25 सालों में इसे अपनी सोच और कार्यक्षमता के साथ विकसित देशों की श्रेणी में शामिल करें।

वेबिनार का यु-ट्यूब पर भी लाइव प्रसारण किया गया, जिसे सैकड़ों लोगों ने लाइव देखा। धन्यवाद ज्ञापन रीजनल आउटरीच ब्यूरो के कार्यालय प्रमुख और क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री शाहिद रहमान ने किया। वेबिनार में विशेषज्ञों के अलावा डा. श्यामा प्रसाद मुखजी युनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के शोधार्थी, शिक्षक, नेहरू युवा केंद्र पलामू, राष्ट्रीय सेवा योजना, पलामू के स्वयंसेवकों के अलावा छात्र, पीआईबी, आरओबी, एफओबी, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के अधिकारी-कर्मचारियों तथा दूसरे राज्यों के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। गीत एवं नाटक विभाग के अंतर्गत कलाकार एवं सदस्य, आकाशवाणी के पीटीसी, दूरदर्शन के स्ट्रिंगर तथा संपादक और पत्रकार भी शामिल हुए।

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