सीबीआई की रडार पर राज्य के 88 एनजीओ, विदेशी फंड के दुरुपयोग का आरोप

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लाइव पलामू न्यूज/रांची: एफसीआरए के तहत झारखंड के गैर सरकारी संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंड के दुरुपयोग को लेकर सीबीआई की कार्रवाई के बाद झारखंड के उन 88 एनजीओ की भी मुश्किलें बढ़ने की संभावना नजर आ रही है जिन पर जांच में पहले ही अनियमितता की पुष्टि हो चुकी है। इन सभी एनजीओ को सीबीआई ने रडार पर रखा हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से पहले ही इनके जांच की अनुशंसा की थी। अब जब विदेशी फंड के दुरुपयोग की सीबीआई जांच शुरु हुई है तब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इन एनजीओ की भी जांच की जाएंगी। 2018 से ही झारखंड में विदेशी फंड के दुरुपयोग का मामला सामने आता रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान एक खास पार्टी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विदेशी फंड का दुरूपयोग का मामला प्रकाश में आया था। इसकी जांच का जिम्मा सीआईडी के पास था लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

जब सीआइडी ने 88 एनजीओ के खिलाफ जांच की तो विदेशी फंड के इस्तेमाल में अनियमितता सामने आई । इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में जांच की अनुशंसा केंद्रीय गृह मंत्रालय से की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार सीबीआई ने झारखंड सहित 10 अन्य राज्यों के 40 एनजीओ पर छापेमारी की थी।इन राज्यों में झारखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, असम व मणिपुर शामिल हैं। यहां सीबीआइ ने 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया, जिनमें छह सरकारी कर्मी शामिल थे। छापेमारी के दौरान सीबीआइ ने कुल 3.21 करोड़ रुपये जब्त किए थे। सीबीआइ की यह छापेमारी रांची में हवाला का काम करने वाले विमल तेवरिया के बरियातू थाना क्षेत्र के मोरहाबादी में कुसुम बिहार स्थित आवास और एनजीओ सृजन फाउंडेशन के रांची में दीपाटोली कार्यालय व हजारीबाग के मटवारी स्थित मुख्यालय पर भी हुई। इसमें हवाला कारोबारी विमल तेवरिया के यहां से 57 लाख 900 रुपये नकद मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड पुलिस की सीआइडी की जांच में यह सामने आया था कि सभी एनजीओ ने करोड़ों रुपये का गलत लेखा-जोखा दिखाया। संदिग्ध भुगतान किया और धर्म विशेष के प्रचार-प्रसार पर राशि खर्च की सरकार को गलत सूचना दी। विदेशी चंदे का दुरुपयोग राज्य के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया गया। एफसीआरए के मुताबिक एक करोड़ से अधिक के विदेशी फंड को नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक था।

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