11 साल से प्रोन्नति का इंतजार कर रहे झाप्रसे के अधिकारी

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 पिछले 11 वर्षों से राज्य में प्रशासनिक अधिकारी प्रोन्नति के इंतजार में हैं। जबकि प्रोन्नति समिति की बैठक भी हो चुकी है। पर इस बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। प्रोन्नति नहीं मिलने की वजह से राज्य में एसडीओ रैंक का 200 पद खाली पड़ा हुआ है। नाम नहीं छापने की शर्त पर इसकी जानकारी देते हुए एक प्रशासनिक पदाधिकारी ने बताया कि झारखंड में काम करिए मगर प्रोन्नति मत मांगिए ऐसा ही कुछ हाल हम प्रशासनिक अधिकारियों की हो गई है। राज्य में जेएएस के 120 अधिकारी पिछले 11 साल से प्रोन्नति के इंतजार में हैं।

प्रोन्नति नहीं मिलने की वजह से राज्य में एसडीओ रैंक के 200 पद खाली हैं। खाली जगहों पर प्रभार के जरिए काम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बेसिक ग्रेड से अनुमंडल पदाधिकारी रैंक में प्रोन्नति के लिए 5 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। जबकि जेएएस के अधिकारियों के सेवाकाल के 11 साल हो चुके हैं। बावजूद झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को प्रोन्नति देने में विलंब हो रहा है। रोक के बावजूद समाज कल्याण विभाग द्वारा समाज कल्याण पदाधिकारी एवं गृह विभाग द्वारा कारा अधीक्षक में प्रोन्नति दे दी गई है। अनुमंडल स्तरीय डीपीसी की बैठक भी इन पदाधिकारियों की तरह प्रोन्नति पर रोक लगने से पहले हुई थी। प्रोन्नति देने की मांग को लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से मिले थे।

आश्वासन भी मिला, पर हुआ कुछ नहीं। प्रोन्नति मामले की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने विशेष समिति भी बनाई थी। समिति ने पूरे मामले पर 10 फरवरी 2021 को विधानसभा को रिपोर्ट भी सौंप दी है। बताते चलें कि एससी/एसटी अधिकारियों को गलत तरीके से प्रोन्नति दिए जाने के बाद सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों की प्रोन्नति पर रोक लगा दी है। गड़बड़ी को लेकर विधानसभा समिति ने अपने 300 पन्नों वाली जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

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