बरवाडीह-मंडल रोड जर्जर हर बार केवल बन कर रह जाता है चुनावी मुद्दा

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लातेहार/बरवाडीह (मयंक विश्वकर्मा) : बंद पड़ी मंडल डेम परियोजना की लाइफ लाइन कही जाने वाली बरवाडीह-मंडल रोड अपनी अंतिम साँसे गिन रही है। इस सड़क के दोनों ओर लगभग आधे दर्जन प्रखंड मुख्यालय का सुदूरवर्ती गाँव है। इन सभी सुदूरवर्ती गांवो के लोगो का प्रखंड मुख्यालय आने जाने का एक मात्र सड़क है, जो पूरी तरह से खस्ता हाल एवं जर्जर हो चुकी है।
वही बरसात के मौसम आते ही इस सड़क की स्थिति बद से बत्तर हो जाती है। इस क्षेत्र में रहने वाले लोगो का दैनिक जीवन एवं व्यवसायिक कार्य के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं एवं जरूरतों को पूरा करने के लिए इस सड़क से आना जाना पड़ता है। सड़क की स्थिति काफी दयनीय होने के चलते आज यह स्थिति हो गई है कि अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधित समस्या हो तो समय पर एम्बुलेन्स नही पहुँच सकता।
बाताते चले कि यह रोड बरवाडीह-मंडल होते हुए भंडरिया भाया छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज को भी जोड़ता है। जो व्यावसायिक एवं सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। लोगो की माने तो बरवाडीह से रामानुजगंज इस सड़क को बनने से 65 किलोमीटर हो जाएगी। जो झारखंड एवं छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगो के सांस्कृतिक एवं रोजगार के नये दरवाजे खोल सकती है।
लेकिन विडंबना यह है कि हर बार बरवाडीह-मंडल रोड चुनावी मुद्दा बनकर रह जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के बाद नेताओं को न अपना चुनावी वादा याद रहता है न ही हमलोगों की समस्याओं पर उनको कोई असर पड़ता है। चुनाव जीतने के बाद दिल्ली या राँची में आसान लगाकर अगले पांच साल के लिए बैठा जाते है।
मालूम हो कि इस सड़क का निर्माण 1967 में यानी आज लगभग 51 साल पहले नरेगेशन डिपार्टमेंट माध्यम से हुआ था, इसके बाद यह रोड पीडब्लूडी के अधीन चला गया। फिर भी पिछले 30 वर्षों से यह रोड जर्जर स्थिति में है। जिस कारण हर समय दुर्घटनाओं की संभावनाएं बनी रहती है। वही प्रखण्डवासियों ने चुने हुये जनप्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से अपील की है कि बरवाडीह-मंडल रोड हरहाल में बनना चाहिये, क्योकि जनता सभी जनप्रतिनिधियों की क्रियाकलापों को बड़ी गहनता के साथ देख रही है।
पीएम मोदी ने किया था मंडल डेम परियोजना का शिलान्यास
झारखंड की बंद पड़ी बहुप्रतीक्षित मंडल डेम परियोजना जिसका शिलान्यास देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के द्वारा लगभग 2 वर्ष पूर्व पलामू जिले के मेदिनीनगर हवाई अड्डा से ऑनलाइन शिलान्यास किया गया था। इस क्षेत्र के लोग इन दोनों परियोजनाओं के लेकर अभी आशान्वित है, लेक़िन जरूरत हैं, एक मजबूत राजनीतिक इक्षाशक्ति की, ना कि ढुलमुल रवैये की।

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