पलामू में एफसीआई व आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से धान खरीदारी में फर्जीवाड़ा, हुसैनाबाद के बेनी कला से चार किसानों ने पंड़वा में बेचा धान।।

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मेदिनीनगर/शिवेन्द्र कुमार: पलामू में एक ओर जहां अभी भी कई किसान ऐसे हैं जो अपने धान को अभी तक बेच नहीं पाये हैं। किसान एफसीआई व आपूर्ति विभाग की राह देखते रह गये। वहीं एफसीआई व आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से लगातार धान खरीदारी में फर्जीवाड़ा होता रहा। अभी एक ताजा मामला पकड़ में आया है कि हुसैनाबाद के किसान के नाम पर पड़वा में धान बेचा गया है। जबकि हुसैनाबाद से पड़वा की दूरी 75 किलोमीटर है। आखिर हुसैनाबाद के किसान पड़वा में लाकर अपने धान को क्यों बेचेंगे। क्योंकि जो भी किसान हुसैनाबाद से पड़वा अपने धान को बेचने के लिए लाएगा।

उसे अतिरिक्त वाहन खर्च करना पड़ेगा। जबकि सरकारी आंकड़ों को देखा जाए तो कई ऐसे किसान है जो पड़वा में धान बिक्री किया गया है। इसे लेकर किसानों में काफी रोष है। किसानों का कहना है कि जो वास्तव में किसान है। उनके धान को तो खरीदा नहीं गया। बल्कि किसान के नाम पर दूसरे लोग मालामाल हो गए गये। ताजा मामला हुसैनाबाद के बेनी कला गांव का प्रकाश में आया है। यहां पर आपूर्ति या इससे संबंधित अन्य विभागों ने ऐसे लोगों को भी उस गांव का किसान बना दिया जो वहां के निवासी ही नहीं है। उनके पास वहां जमीन कितनी है।
यह बात तो कोसों दूर है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यहां पर उक्त संबंधित लोगों में कई ऐसे किसान हैं। जिन्होंने अपना धान हुसैनाबाद व्यापाार मंडल में बिक्री नहीं कर वहां से लगभग लगभग 75 किमी दूर पंड़वा प्रखंड कार्यालय स्थित धान अधिप्राप्ति केंद्र में धान की बिक्री की है। इतना ही नहीं आईडी नंबर ट्रांसफर के हेरफेर कर इन लोगों को धान अधिप्राप्ति का भुगतान भी कर दिया गया है।
इन किसानों में अरूण कुमार गुप्ता पिता राम साह, रेणु देवी पति अनिल कुमार कई ऐसे लोग हैं जो पड़वा प्रखंड कार्यालय में धान की बिक्री किए हैं। इतना ही नहीं ये बेनी कला गांव के इतने बड़े किसान बताये गये हैं कि अरूण कुमार गुप्ता ने 480 क्विंटल, रेणु देवी ने 320 क्विंटल धान बेचा है।
यहां ज्ञात हो कि आईडी नंबर का दूसरे केंद्र में ट्रांसफर जिला आपूर्ति विभाग करता है। विशेष परिस्थिति में इस कार्य को एफसीआई भी करता है। ऐसा तब ही किया जाता है तब किसान आवेदन दे कि उसके गांव से उक्त धान अधिप्राप्ति केंद्र नजदीक है। आखिर यह सवाल उठना लाजमी है कि उनके आवेदन को किस आधार पर उक्त गांव से 75 किमी दूर के केंद्र में स्थानांतरित किया गया। यह जांच का विषय है।
इस संबंध में हुसैनाबाद के बेनी कला गांव में पता करने के बाद पता चला कि वे वहां के निवासी ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिला आपूर्ति विभाग ने आखिरकार किसानों की हकमारी कर ऐसे कितने लोगों को लाभ पहुंचाया है? विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिले में ऐसे किसानों के रूप में बिचौलियों की संख्या सैकड़ों में है।

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